
550 वर्ग फुट प्रस्ताव को खारिज, 150 से अधिक रहिवासी एकजुट; पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया से डेवलपर चुनने का फैसला
मुंबई | माहीम के ऐतिहासिक मच्छीमार नगर के पुनर्विकास को लेकर अब खुलकर संघर्ष की स्थिति बन गई है। इमारत संख्या 1 से 20 तक फैले इस इलाके के 150 से अधिक निवासी एकजुट होकर अपनी मांगों पर अडिग हो गए हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि वे किसी भी दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप के आगे झुकने वाले नहीं हैं।

विवाद तब तेज हुआ जब कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा विधान परिषद में कथित रूप से ऐसा प्रस्ताव रखने की बात सामने आई, जिसमें निवासियों को पुनर्विकास के बाद केवल 550 वर्ग फुट का घर देने की कोशिश की जा रही है। स्थानीय लोगों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनके हितों के खिलाफ बताया है।
मच्छीमार नगर निवासी महासंघ के अनुसार, वर्तमान में अधिकांश परिवार करीब 180 वर्ग फुट के छोटे घरों में रहते हैं, लेकिन पुनर्विकास के बाद वे सम्मानजनक और पर्याप्त जगह चाहते हैं। महासंघ ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रमुख मांग हर पात्र निवासी को कम से कम 1050 वर्ग फुट कार्पेट एरिया का घर देने की है।

हाल ही में महासंघ के कार्यालय में आयोजित एक अहम बैठक में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के आधार पर कई शर्तें तय की गईं। इनमें पुनर्विकास अवधि के दौरान प्रति परिवार 50 हजार रुपये मासिक किराया, हर साल 10 प्रतिशत की वृद्धि, और प्रत्येक सदस्य को 20 लाख रुपये की कॉर्पस राशि देने की मांग शामिल है।
निवासियों का कहना है कि यह केवल घर का सवाल नहीं, बल्कि उनके जीवन स्तर और भविष्य की सुरक्षा का मुद्दा है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी कीमत पर वे अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे और पुनर्विकास प्रक्रिया उनकी शर्तों पर ही आगे बढ़ेगी।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महासंघ ने डेवलपर चयन की प्रक्रिया भी अपने हाथ में ले ली है। इसके तहत ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है, जिससे एक सक्षम और योग्य डेवलपर का चयन किया जा सके। महासंघ का कहना है कि इसी प्रक्रिया के आधार पर अंतिम प्रस्ताव तैयार कर संबंधित प्राधिकरण के समक्ष पेश किया जाएगा।

इस बीच निवासियों ने अफवाहों और बाहरी हस्तक्षेप को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अपील की है कि कोई भी व्यक्ति या समूह गलत जानकारी फैलाकर पुनर्विकास प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश न करे।
प्रदर्शन के दौरान रहवासियों ने एकजुटता का संदेश देते हुए कहा, “हम अपने हक के लिए साथ हैं और रहेंगे। किसी भी तरह के भ्रम या दबाव में नहीं आएंगे।”
माहीम मच्छीमार नगर का यह विवाद अब केवल पुनर्विकास का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह निवासियों के अधिकार, सम्मान और भविष्य की लड़ाई का प्रतीक बनता जा रहा है।