Mumbai के सायन इलाके स्थित वर्कर्स कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (Brihanmumbai Municipal Corporation) के एक फैसले को लेकर बड़ा प्रशासनिक और जनविरोधी विवाद खड़ा हो गया है। सोसायटी परिसर में चार इमारतों को “खतरनाक” घोषित किए जाने के बाद स्थानीय निवासियों ने इसे जल्दबाजी और बिना पर्याप्त तकनीकी निरीक्षण के लिया गया निर्णय बताते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया है।
यह मामला उस समय और गंभीर हो गया जब मनपा प्रशासन को हस्तक्षेप करते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश देने पड़े। आयुक्त स्तर पर मामले की समीक्षा शुरू कर दी गई है, जिससे यह विवाद अब केवल स्थानीय समस्या न रहकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवालों का केंद्र बन गया है।
सायन वर्कर्स सेटलमेंट कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी मनपा की 999 वर्ष की लीज पर आवंटित भूमि पर स्थित है। यहां कुल छह इमारतें हैं, जिनमें ए और बी विंग 60 वर्ष से अधिक पुरानी होकर स्वाभाविक रूप से जर्जर स्थिति में बताई जा रही हैं। हालांकि, सी और डी विंग अपेक्षाकृत नई हैं और करीब 30 वर्ष पुरानी होने के कारण निवासियों का दावा है कि वे संरचनात्मक रूप से सुरक्षित और मरम्मत योग्य स्थिति में हैं।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब एक वास्तु सलाहकार की रिपोर्ट के आधार पर चारों इमारतों को एक साथ खतरनाक घोषित कर दिया गया। इस निर्णय के खिलाफ निवासियों ने निजी स्तर पर स्वतंत्र ढांचागत ऑडिट कराया, जिसमें दावा किया गया कि इमारतें तत्काल पुनर्विकास के बजाय मरम्मत से सुरक्षित की जा सकती हैं। दोनों रिपोर्टों के बीच स्पष्ट विरोधाभास ने पूरे मामले को और उलझा दिया।
इसके बाद Brihanmumbai Municipal Corporation ने तकनीकी समिति का गठन कर पुनः मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन निवासियों का आरोप है कि समिति ने स्थल पर पर्याप्त और विस्तृत निरीक्षण किए बिना ही निष्कर्ष जारी कर दिए। उनका कहना है कि यह निर्णय एकतरफा और पूर्वनिर्धारित प्रतीत होता है।
स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब मनपा ने सोसायटी की बिजली और पानी की आपूर्ति काट दी तथा निवासियों को घर खाली करने के नोटिस जारी कर दिए। प्रभावित नागरिकों ने इसे कठोर और असंवेदनशील कार्रवाई बताते हुए न्यायालय का रुख किया, हालांकि वहां से तत्काल राहत नहीं मिल सकी।
इसी बीच पुणे स्थित एक मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग संस्थान की रिपोर्ट भी सामने आई, जिसमें सी और डी इमारतों को मरम्मत योग्य बताया गया है। इस नए तकनीकी मत ने विवाद को और गहरा कर दिया है, क्योंकि यह मनपा के निष्कर्षों से मेल नहीं खाता।
निवासियों का आरोप है कि वैकल्पिक विशेषज्ञ रिपोर्टों को नजरअंदाज कर प्रशासनिक कार्रवाई तेज की जा रही है, जिससे उनका जीवन और आवासीय सुरक्षा दोनों संकट में पड़ गए हैं।
बढ़ते दबाव के बीच मनपा आयुक्त अश्विनी भिडे ने मामले का संज्ञान लेते हुए उपयुक्त स्तर पर विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस जांच पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि इमारतों का भविष्य मरम्मत से सधेगा या पुनर्विकास की राह पकड़ेगा।