
मुंबई: मानसून आने से पहले ही महाराष्ट्र में जलसंकट की आहट तेज हो गई है। राज्य के बांधों में फिलहाल 30.88 प्रतिशत उपयोगी जलसंग्रह शेष है। हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष के 27.85 प्रतिशत से अधिक है, लेकिन लगातार बढ़ती गर्मी और तेज धूप के कारण जलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। जलसंपदा विभाग ने लोगों से पानी के संयमित उपयोग और जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की अपील की है।
विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य के 3028 बांधों में इस समय 12,612.59 मिलियन घनमीटर उपयोगी जलसंग्रह उपलब्ध है, जबकि कुल परियोजना क्षमता 40,847.9 मिलियन घनमीटर है। आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि यदि अगले कुछ सप्ताह में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो कई हिस्सों में पानी की समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
विभागवार स्थिति पर नजर डालें तो अमरावती संभाग सबसे बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहा है, जहां बांधों में 42.57 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। नागपुर संभाग में 39.89 प्रतिशत जलसंग्रह दर्ज किया गया है। कोंकण क्षेत्र में 35.76 प्रतिशत, छत्रपति संभाजीनगर संभाग में 34.34 प्रतिशत और नाशिक संभाग में 31.23 प्रतिशत पानी बचा हुआ है।
सबसे चिंताजनक तस्वीर पुणे संभाग की सामने आई है। यहां बांधों में केवल 22.10 प्रतिशत उपयोगी जलसंग्रह शेष है। पुणे क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण बांध लगभग सूखने की कगार पर पहुंच चुके हैं। भाटघर बांध में मात्र 8.26 प्रतिशत पानी बचा है, जबकि माणिकडोह में 6.11 प्रतिशत और घोड़ बांध में सिर्फ 1.72 प्रतिशत जलसंग्रह उपलब्ध है। टेमघर और लोणावला टाटा बांधों की स्थिति और भी गंभीर है, जहां उपयोगी जलसंग्रह शून्य प्रतिशत दर्ज किया गया है।
नाशिक संभाग में भी हालात राहत देने वाले नहीं हैं। भावली बांध पूरी तरह खाली हो चुका है। अर्जुनसागर बांध में केवल 6.08 प्रतिशत और वाघाड बांध में 5.45 प्रतिशत पानी शेष है। ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहराने की आशंका के चलते प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ा दी है।
दूसरी ओर विदर्भ क्षेत्र अपेक्षाकृत राहत की स्थिति में है। नागपुर संभाग के कामठी खैरी बांध में 84.62 प्रतिशत जलसंग्रह दर्ज किया गया है। भंडारा जिले के असोलामेंढा बांध में 61.84 प्रतिशत और गोंदिया जिले के पुजारीटोला प्रकल्प में 61.47 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। इससे विदर्भ में फिलहाल जलापूर्ति को लेकर तत्काल संकट की स्थिति नहीं मानी जा रही।
इस बीच मौसम विशेषज्ञों ने एल नीनो के प्रभाव और सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने जलसंधारण, भूजल संरक्षण और पानी के नियोजित उपयोग पर जोर बढ़ा दिया है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले कुछ सप्ताह राज्य के लिए बेहद निर्णायक होंगे। यदि मानसून ने समय पर दस्तक नहीं दी, तो कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत और गंभीर हो सकती है।