
मुंबई में बकरीद से पहले हाउसिंग सोसायटियों और रिहायशी इलाकों में कथित अवैध कुर्बानी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व विधायक संजय उपाध्याय के तीखे बयान ने इस मुद्दे को नया राजनीतिक रंग दे दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपाध्याय ने नियमों के उल्लंघन पर कड़ी चेतावनी देते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की और कहा कि यदि अवैध गतिविधियां नहीं रुकीं तो विरोध के तौर पर वे “सूअर लाने” जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे।
संजय उपाध्याय ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार और प्रशासन की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि हाउसिंग सोसायटियों, सार्वजनिक स्थलों और रिहायशी चालों में जानवरों की कुर्बानी या हत्या की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद कुछ लोग नियमों की अनदेखी कर चोरी-छिपे जानवरों को सोसायटियों में ला रहे हैं और वहीं कुर्बानी की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रिक्शा और टैक्सी के माध्यम से जानवरों की अवैध आवाजाही की जा रही है, जिससे कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा नेता का बयान अचानक और अधिक आक्रामक हो गया। उन्होंने कहा, “अगर आपको सीधे-सीधे बात समझ में नहीं आती, तो जवाब देने के लिए हमें सोसायटी में सूअर लाना पड़े, तो मजबूर करोगे तो सूअर लाएंगे। लेकिन अवैध तरीके से जानवरों की हत्या और कत्ल किसी भी हालत में नहीं होने देंगे।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं।
उपाध्याय ने महाराष्ट्र सरकार की गोवंश संरक्षण नीति का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में गाय को “राज्यमाता” का दर्जा दिया गया है और गोवंश हत्या पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गोवंश हत्या में शामिल आदतन अपराधियों के खिलाफ मकोका जैसे कठोर कानून लगाने के निर्देश दिए हैं। उपाध्याय के अनुसार बदलापुर में उनकी मांग पर गोवंश हत्या के मामलों में आरोपियों पर मकोका के तहत कार्रवाई भी की गई है।
भाजपा नेता ने मुंबई पुलिस और बृहन्मुंबई महानगरपालिका प्रशासन से अपील की कि त्योहारों के दौरान सरकार द्वारा जारी नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, सांप्रदायिक तनाव या कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश को समय रहते रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उधर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बकरीद से पहले इस तरह के बयानों से मुंबई का राजनीतिक वातावरण और अधिक संवेदनशील हो सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानून व्यवस्था बनाए रखने और सामाजिक सौहार्द कायम रखने की होगी।