
विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर मुंबई में तंबाकू और नशे के खिलाफ व्यापक जनजागरण अभियान की शुरुआत की गई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका और महाराष्ट्र राज्य नशाबंदी मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में व्यसनमुक्ति पर आधारित विशेष भित्तीपत्रक प्रदर्शनी का उद्घाटन बीएमसी के उप आयुक्त (सुधार) संजोग कबरे ने किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संजोग कबरे ने कहा कि तंबाकू सिर्फ एक लत नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि यदि तंबाकू सेवन पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में करोड़ों लोग तंबाकूजनित बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं में बढ़ती लत को चिंता का विषय बताया और कहा कि 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग सबसे अधिक जोखिम में है।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों को व्यसनमुक्ति की शपथ दिलाई गई। “तंबाकू को ना कहें” संदेश के साथ लोगों से नशामुक्त जीवन अपनाने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया गया।
महाराष्ट्र राज्य नशाबंदी मंडल के सचिव अमोल मडामे ने कहा कि महाराष्ट्र वर्ष 2011 में व्यसनमुक्ति नीति लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था। उन्होंने बताया कि स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और धार्मिक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू बिक्री रोकने के लिए विशेष कानून प्रवर्तन और जनजागरण अभियान तेज किया जाएगा।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण “तंबाकू का राक्षस” थीम पर आधारित प्रदर्शनी रही। इस रचनात्मक प्रदर्शनी के माध्यम से युवाओं और नागरिकों को तंबाकू के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। प्रदर्शनी में तंबाकू सेवन से होने वाली बीमारियों और सामाजिक दुष्प्रभावों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर बीएमसी के प्रमुख कामगार अधिकारी सुनील जांगळे, सह प्रमुख कामगार अधिकारी दिलीप राठोड, क्षितीजा कंडारकर, चेतना सावंत, मिलिंद पाटील, सलाम मुंबई फाउंडेशन के संजय ठाणगे तथा दीप-अर्चन संस्था के प्रतिनिधि सहित अनेक अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। मुंबई में यह अभियान अब तंबाकूमुक्त समाज की दिशा में एक बड़े सामाजिक संकल्प के रूप में देखा जा रहा है।