
करोड़ों की परियोजना बनी ट्रैफिक जाम का प्रतीक, जनता पूछ रही- आखिर कब पूरा होगा काम?
मुंबई। गोरेगांव का बहुप्रतीक्षित मृणालताई गोरे फ्लाईओवर अब विकास कम और प्रशासनिक अव्यवस्था का बड़ा उदाहरण ज्यादा बनता जा रहा है। खराब योजना, बार-बार बदले गए डिजाइन, धीमी कार्यप्रणाली और वर्षों की देरी ने इस परियोजना को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। हालत यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद फ्लाईओवर आज भी अधूरा पड़ा है और रोजाना लाखों मुंबईकर ट्रैफिक जाम की यातना झेलने को मजबूर हैं।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि मनपा की लापरवाही और कछुआ गति ने पूरे इलाके की यातायात व्यवस्था को चरमरा दिया है। सुबह और शाम के पीक आवर्स में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में लोगों को घंटों लग जाते हैं। गर्मी, प्रदूषण और लगातार बढ़ते जाम ने स्थानीय लोगों का सब्र तोड़ दिया है।
दरअसल, इस फ्लाईओवर को उपनगरों की ट्रैफिक समस्या कम करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, लेकिन अब यही परियोजना लोगों की परेशानी का सबसे बड़ा कारण बन गई है। शुरुआत में इसकी अनुमानित लागत करीब 197 करोड़ रुपये बताई गई थी, लेकिन डिजाइन में बदलाव, निर्माण में देरी और प्रशासनिक खामियों के चलते अब इसकी लागत 250 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है। इसके बावजूद प्रोजेक्ट के पूरा होने की स्पष्ट समयसीमा अब तक तय नहीं हो सकी है।
जनता का आरोप है कि प्रशासन केवल फाइलों में डेडलाइन बढ़ाने और प्रेस नोट जारी करने तक सीमित रहा। जमीन पर काम की रफ्तार आज भी बेहद धीमी है। हाल ही में उप महापौर संजय घाडी ने मौके का दौरा कर अधिकारियों को काम तेज करने के निर्देश दिए, लेकिन स्थानीय नागरिक इसे महज औपचारिकता बता रहे हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते निगरानी और जवाबदेही तय की गई होती, तो आज उपनगर की जनता को इस बदहाल स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि लगातार जाम और अधूरे निर्माण कार्य के कारण कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। सड़क किनारे धूल, बैरिकेडिंग और अव्यवस्थित ट्रैफिक ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। स्कूल बसों से लेकर एंबुलेंस तक घंटों जाम में फंस रही हैं।
सबसे बड़ी चिंता अब आने वाले मॉनसून को लेकर है। नागरिकों को डर है कि बारिश शुरू होते ही अधूरे निर्माण कार्य और खराब ट्रैफिक प्रबंधन के कारण हालात और बिगड़ जाएंगे। जलभराव और ट्रैफिक जाम का दोहरा संकट पूरे इलाके को प्रभावित कर सकता है।
लोग अब सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी परियोजना के बावजूद जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई? क्या मुंबईकरों को सिर्फ आश्वासन और बढ़ती लागत ही मिलती रहेगी?
मृणालताई गोरे फ्लाईओवर आज केवल एक अधूरा पुल नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुस्ती, अव्यवस्था और योजनागत विफलता की कहानी बन चुका है।