Home राजनीतिराज्यउत्तर प्रदेशपहाड़ों से काशी की ओर बढ़ा रुख, श्रद्धालुओं और सैलानियों से पटी धर्मनगरी

पहाड़ों से काशी की ओर बढ़ा रुख, श्रद्धालुओं और सैलानियों से पटी धर्मनगरी

by trilokvivechana
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घाट, गलियां और होटल हुए खचाखच, गंगा आरती में उमड़ रही रिकॉर्ड भीड़

वाराणसी। गर्मी की छुट्टियों के बीच देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर उमड़ रही भारी भीड़ का असर अब धर्मनगरी काशी में भी साफ दिखाई देने लगा है। पहाड़ी राज्यों में लंबे ट्रैफिक जाम, होटलों की कमी और पर्यटकों के बढ़ते दबाव के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु और सैलानी अब वाराणसी का रुख कर रहे हैं। नतीजतन, काशी इन दिनों श्रद्धा, पर्यटन और भीड़ के अभूतपूर्व संगम का केंद्र बन गई है।

शहर के प्रमुख घाटों, मंदिरों और पर्यटन स्थलों पर सुबह से देर रात तक लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है। विशेष रूप से काशी विश्वनाथ धाम, दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, गोदौलिया और मैदागिन क्षेत्र में पैर रखने तक की जगह नहीं बच रही। शाम की विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालु घंटों पहले घाटों पर पहुंच रहे हैं, जिसके कारण आरती शुरू होने से पहले ही अधिकांश स्थान भर जा रहे हैं।

काशी पहुंचने वाले यात्रियों की बढ़ती संख्या का असर परिवहन व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। शहर आने वाली कई ट्रेनों में लंबी प्रतीक्षा सूची चल रही है, जबकि हवाई किराये में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। होटल, धर्मशालाएं, लॉज और गेस्ट हाउस लगभग पूरी तरह भरे हुए हैं। कई पर्यटकों को पहले से बुकिंग नहीं होने के कारण ठहरने की व्यवस्था के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र तथा दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक काशी पहुंच रहे हैं। इससे स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग, परिवहन सेवाओं और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े कारोबार में जबरदस्त तेजी आई है। बाजारों में रौनक बढ़ गई है और कई क्षेत्रों में दुकानें देर रात तक खुली रह रही हैं।

हालांकि बढ़ती भीड़ ने प्रशासन और स्थानीय नागरिकों की चुनौतियां भी बढ़ा दी हैं। शहर के कई हिस्सों में यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों को दैनिक आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें आम दृश्य बन गई हैं। कई स्थानों पर लोग वाहनों की बजाय पैदल चलना अधिक सुविधाजनक समझ रहे हैं।

पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां और धार्मिक पर्यटन का बढ़ता आकर्षण जून महीने में भी काशी में भीड़ को बनाए रखेगा। ऐसे में प्रशासन के सामने व्यवस्था संभालने की बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल बाबा विश्वनाथ की नगरी श्रद्धा और पर्यटन के नए रिकॉर्ड दर्ज करती नजर आ रही है।

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