Home ताजा खबरबीमा सेक्टर में इस्तीफों की बाढ़!, करोड़ों की नौकरी छोड़ उद्यमी बन रहे दिग्गज सीईओ

बीमा सेक्टर में इस्तीफों की बाढ़!, करोड़ों की नौकरी छोड़ उद्यमी बन रहे दिग्गज सीईओ

by trilokvivechana
0 comments

भारत के विशाल बीमा बाजार पर दांव, नई कंपनियां खड़ी करने की होड़ तेज

मुंबई। भारत का बीमा बाजार तेजी से बदल रहा है। एक ओर जीवन और साधारण बीमा क्षेत्र में अपार संभावनाएं दिखाई दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर देश की नामी बीमा कंपनियों के शीर्ष अधिकारी अपने प्रतिष्ठित पदों को छोड़कर नए कारोबार की राह पकड़ रहे हैं। लगातार हो रहे इन इस्तीफों ने पूरे वित्तीय जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और यह सवाल उठने लगा है कि आखिर करोड़ों रुपये के पैकेज और सुरक्षित पद छोड़ने के पीछे वजह क्या है?

हाल के महीनों में कई बड़े नाम इस सूची में शामिल हुए हैं। टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ नीलेश गर्ग, एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ अनुज त्यागी तथा जनराली इंडिया इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ अनुप राव जैसे अनुभवी अधिकारी अपने पदों से विदा ले चुके हैं। उद्योग जगत में इन इस्तीफों को सामान्य बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़े कारोबारी ट्रेंड के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अभी भी दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां बीमा की पहुंच अपेक्षाकृत कम है। गैर-जीवन बीमा क्षेत्र की पहुंच देश की जीडीपी के मुकाबले केवल लगभग एक प्रतिशत है, जबकि वैश्विक औसत चार प्रतिशत से अधिक है। यही अंतर अनुभवी पेशेवरों को नए अवसरों की ओर आकर्षित कर रहा है।

जानकारों के अनुसार, बीमा क्षेत्र के दिग्गज अब केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे निजी इक्विटी निवेशकों के साथ साझेदारी कर अपनी कंपनियां खड़ी करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण नीलेश गर्ग हैं, जिन्होंने टाटा एआईजी छोड़कर अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फर्म वेस्टब्रिज के साथ मिलकर ‘कीवी जनरल इंश्योरेंस’ की स्थापना की है। इस नई कंपनी में वेस्टब्रिज की 70 प्रतिशत और गर्ग की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई जा रही है। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने मार्च 2026 में इस कंपनी को बीमा कारोबार शुरू करने की मंजूरी भी दे दी है।

इसी तरह एचडीएफसी एर्गो से अलग हुए अनुज त्यागी ने भी उद्यमिता की दिशा में कदम बढ़ाने का संकेत दिया है। वहीं उद्योग सूत्रों के अनुसार अनुप राव भी किसी नए बीमा उद्यम से जुड़ने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

बीमा क्षेत्र में इस बदलाव के पीछे नियामकीय सुधारों की भी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। हाल के वर्षों में आईआरडीएआई ने कई नियमों को सरल बनाया है, जिससे नई कंपनियों के लिए बाजार में प्रवेश आसान हुआ है। इसके साथ ही सरकार द्वारा बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति देने से निवेशकों का भरोसा और बढ़ा है। ‘बीमा सुगम’ और यूपीआई जैसी डिजिटल पहलों ने ग्राहकों तक पहुंचने के तरीके को भी पूरी तरह बदल दिया है।

बीमा उद्योग में नई संभावनाओं का सबसे प्रेरक उदाहरण स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की कहानी मानी जाती है। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के पूर्व सीएमडी कटसामी जगन्नाथन ने सेवानिवृत्ति के बाद चेन्नई के एक छोटे से कार्यालय से इस कंपनी की शुरुआत की थी। आज यह कंपनी लगभग 30 हजार करोड़ रुपये के मूल्यांकन तक पहुंच चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का बीमा बाजार अभी अपनी वास्तविक क्षमता तक नहीं पहुंचा है। ऐसे में अनुभवी नेतृत्व, दीर्घकालिक निवेश और तकनीकी नवाचार का मेल आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में नए इतिहास लिख सकता है। यही कारण है कि आज कई बड़े सीईओ नौकरी छोड़कर अपना भविष्य खुद गढ़ने की तैयारी में जुटे हैं।

You may also like

Leave a Comment

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?
-
00:00
00:00
Update Required Flash plugin
-
00:00
00:00