
मुंबई। तेजी से बदलते आधुनिक दौर और डिजिटल मनोरंजन के बीच देश की पारंपरिक खेल संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने की एक अनूठी पहल चेंबूर में देखने को मिली। उपनगर जिला विटी-दांडू एसोसिएशन, मुंबई तथा युवा चेंबूर प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में चेंबूर हाई स्कूल परिसर में आयोजित ‘मुंबई महापौर चषक गुल्ली-डंडा प्रतियोगिता-2026’ ने न केवल खिलाड़ियों में उत्साह का संचार किया, बल्कि महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को भी नई ऊर्जा प्रदान की।
प्रतियोगिता में विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने पूरे जोश और खेल भावना के साथ हिस्सा लिया। मैदान में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के साथ-साथ दर्शक दीर्घा में मौजूद छात्रों का उत्साह भी देखते ही बन रहा था। पारंपरिक खेलों के प्रति बच्चों और युवाओं की बढ़ती रुचि ने यह साबित कर दिया कि देशी खेल आज भी लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए हुए हैं।
इस अवसर पर एम-पश्चिम प्रभाग समिति की अध्यक्ष आशा मराठे, शिक्षण समिति की अध्यक्षा राजेश्री शिरवाड़कर तथा चेंबूर के युवा समाजसेवक जयप्रकाश अग्रवाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने खेल और संस्कृति के अनूठे संगम का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया।
विशेष आकर्षण तब देखने को मिला जब समाजसेवक जयप्रकाश अग्रवाल स्वयं मैदान में उतरे और खिलाड़ियों के साथ गुल्ली-डंडा खेलकर बचपन की यादों को ताजा किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की मिट्टी से जुड़े पारंपरिक खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक विरासत के प्रतीक हैं। इन्हें संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
अग्रवाल ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए वाबले सर और लिमकर सर का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खिलाड़ियों का जोश, दर्शकों की सक्रिय भागीदारी और पारंपरिक खेलों के प्रति लोगों का प्रेम यह संदेश देता है कि देशी खेलों की चमक आज भी फीकी नहीं पड़ी है। ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।