वेतन, पेंशन और निजीकरण के खिलाफ संयुक्त मोर्चे की चेतावनी, मुंबई की बस सेवा पर मंडराया संकट
मुंबई। बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) उपक्रम में वर्षों से लंबित मांगों को लेकर कर्मचारियों का असंतोष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। विभिन्न श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच ‘BEST जॉइंट लेबर एक्शन कमेटी’ ने साफ चेतावनी दी है कि यदि महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और BEST प्रशासन ने कर्मचारियों की मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं लिया, तो गुरुवार से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। इस घोषणा से मुंबई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ने की आशंका गहरा गई है।
मंगलवार को आयोजित पत्रकार परिषद में समिति के नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दे वर्षों से लंबित पड़े हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन की ओर से उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इसी के विरोध में विभिन्न यूनियनों ने मतभेद भुलाकर एक साझा मंच के तहत संघर्ष का बिगुल फूंका है।
संयुक्त समिति की प्रमुख मांगों में BEST के घाटे वाले ‘सी’ बजट को बीएमसी के मुख्य ‘ए’ बजट में शामिल करना, वर्ष 2016 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों और अधिकारियों को उनके सभी वैधानिक बकाए तथा न्यायालय द्वारा निर्धारित ब्याज सहित राशि का एकमुश्त भुगतान करना, वर्ष 2016-2026 के वेतन समझौतों को लागू करते हुए सातवें वेतन आयोग के अनुरूप बकाया राशि का भुगतान करना तथा परिवहन और बिजली विभागों में लागू ठेका व्यवस्था को समाप्त करना शामिल है।
यूनियनों ने BEST के स्वामित्व वाली 5,000 नई बसें खरीदने, रिक्त पदों पर स्थायी भर्ती करने, वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति देने तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत उपक्रम की संपत्तियों के हस्तांतरण या लीजिंग पर रोक लगाने की भी मांग की है। समिति का कहना है कि BEST का विस्तार और विकास निजीकरण के बजाय “स्व-विकास मॉडल” के आधार पर किया जाना चाहिए।
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि 2016 के बाद सेवानिवृत्त हुए अनेक कर्मचारियों को आज तक उनकी पूरी वैधानिक देनदारियां नहीं मिली हैं। किश्तों में किए गए भुगतान के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं, 2016-2021 के अंतरिम वेतन समझौते के बावजूद बकाया राशि अब तक नहीं दी गई है, जबकि 2021-2026 की वेतन संधि, जिसे सातवें वेतन आयोग से जोड़ा गया है, अभी तक अधर में लटकी हुई है।
निजीकरण के मुद्दे पर भी यूनियनों ने तीखी आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि वर्तमान में BEST की केवल 249 स्वामित्व वाली बसें ही सड़कों पर चल रही हैं, जबकि लगभग 2,000 बसें ठेकेदारों के माध्यम से संचालित की जा रही हैं। समिति का कहना है कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की जरूरतों को देखते हुए कम से कम 5,000 बसों का बेड़ा आवश्यक है।
आंदोलन के बीच प्रशासन सख्त, छुट्टियों पर लगाई रोक
हड़ताल की चेतावनी के बाद BEST प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। महाप्रबंधक सोनिया सेठी ने एक परिपत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि परिवहन और बिजली सेवाएं महाराष्ट्र आवश्यक सेवा संरक्षण अधिनियम-2023 के तहत “आवश्यक सेवाओं” की श्रेणी में आती हैं। इसी के मद्देनजर 18 जून से प्रस्तावित आंदोलन की अवधि तक कर्मचारियों की नियमित छुट्टियों पर रोक लगा दी गई है।
परिपत्र के अनुसार केवल चिकित्सकीय अवकाश अथवा विशेष परिस्थितियों में विभागाध्यक्ष की संतुष्टि के आधार पर ही छुट्टी मंजूर की जाएगी। सभी विभागाध्यक्षों, डिपो प्रबंधकों तथा परिवहन एवं विद्युत विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
उधर, BEST को मिलने वाली बीएमसी की एक हजार करोड़ रुपये की वार्षिक आर्थिक सहायता भी फिलहाल स्थायी समिति द्वारा रोक दी गई है। बढ़ती दुर्घटनाओं, वित्तीय पारदर्शिता और लंबित देनदारियों को लेकर उठे सवालों के बीच कर्मचारियों के आंदोलन की चेतावनी ने BEST के सामने नया संकट खड़ा कर दिया है। यदि बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकला, तो मुंबई की जीवनरेखा मानी जाने वाली सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।