
तेहरान। शनिवार सुबह मध्य-पूर्व की धरती पर एक नयी और सबसे तेज़ घटनाक्रम वाली लड़ाई शुरू हुई, जिसने वैश्विक भू-राजनीति के समीकरण को पलट दिया। संयुक्त इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका की सैन्य विमानन एवं मिसाइल क्षमता द्वारा किए गए आधुनिक, तेज़ और सटीक हमलों में उस समय तक कभी न देखे गए पैमाने पर ईरानी नेतृत्व और महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। शुरुआत में ही हमलों के 30 सेकंड के भीतर दर्जनों बम दागे गए और 30 प्रमुख नेता, कमांडर तथा वरिष्ठ अधिकारी मारे गए जिसके परिणामस्वरूप ईरान की पूरी नेतृत्व संरचना हिल गई।
इस जोड़े गए हमला अभियान का मुख्य लक्ष्य ईरान की सैन्य और शासन व्यवस्था को भारी क्षति पहुँचना था और हालांकि प्रारंभ में समाचार एजेंसियों में सूचना में कुछ विरोधाभास थे, कतारबद्ध रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया ने स्वयं कर दी है।
आक्रमण की शुरुआत — विस्फोटों की सुबह
शनिवार की सुबह करीब 09:30 (स्थानीय समय) के आसपास, इजराइल और अमेरिका की संयुक्त वायु शक्ति ने तेहरान के कई हिस्सों और रणनीतिक ठिकानों पर प्रहार शुरू किया। सबसे पहले फासदें, सैन्य बुनियादी ढाँचे और कमांड नियंत्रण केंद्रों को लक्ष्य बनाया गया, जिनमें से कई सुरक्षित और किलेबंद संरचनाएँ थीं। इन हमलों का खास ध्यान कई शहरों में फैले 30 रणनीतिक ज़ोन पर था, जिनमें ईरान के उच्चस्तरीय नेतृत्व के केंद्रीय कार्यालय, सैन्य कमान केंद्र और सुरक्षा कक्ष शामिल थे। ये हमले ‘30 सेकंड प्लान’ के तहत किए गए — जिनमें भारी वजन वाले बम (लगभग 30 टन तक संयुक्त विस्फोटक शक्ति) शामिल थे ताकि कम समय में अधिकतम विनाश सुनिश्चित हो सके।

खामनेई की मौत और परिवार का नुकसान
हमले के सबसे विवादित और महत्वपूर्ण परिणामों में से एक था ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की मौत। ईरानी राज्य मीडिया और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने इसकी पुष्टि की है — हालांकि कुछ रिपोर्टों में विवरणों में भिन्नता रही। राज्य-चालित प्रसारण ने घोषणा की कि खामनेई सहित उनके परिवार के कई सदस्य — जिनमें उनकी बेटी, पोता और बहू जैसे नज़दीकी लोग भी शामिल थे — हमले में मारे गए। उनकी मृत्यु क्रमिक घटनाओं में सबसे बड़ा मोड़ मानी जा रही है क्योंकि खामनेई ने चार दशकों से अधिक समय तक ईरानी शासन के हर आयाम पर नियंत्रण रखा था। उनके निधन ने न केवल देश की शासन व्यवस्था में भारी खालीपन पैदा कर दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र की तटस्थता और राजनैतिक संतुलन को भी हिला दिया है।
रणनीतिक लक्ष्य और उच्च नेतृत्व का ध्वस्त होना
साथ ही, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के शीर्ष कमांडर और कई वरिष्ठ रक्षा सलाहकार भी हमलों में मारे गए। रिपोर्टों में बताया गया कि मारे गए नेताओं में रक्षा मंत्री, प्रमुख सैन्य सलाहकार, और सुरक्षा काउंसिल के सदस्य शामिल थे — जिससे ईरान के सैन्य और नीति-निर्धारण ढाँचे का केंद्र हिल चुका है। इस बड़े हमले के बाद इजराइल ने घोषणा की कि उसका अभियान “ईरान की उग्रवाद क्षमता को भंग करने” के लिए डिज़ाइन किया गया था — लेकिन इस अभियान के व्यापक बाज़ार प्रभाव, राजनीतिक परिणाम और मानवाधिकार प्रश्न ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है।
ईरानी प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय तनाव
ईरान ने हमले को “अवैध और एक आक्रमण” करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी अधिकारियों ने मिसाइलों और ड्रोन के जरिए कई बिंदुओं पर प्रतिशोधी हमले किए हैं — जिनमें गुल्फ़ क्षेत्र के देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों और उनके सहयोगी क्षेत्रीय शहर भी शामिल रहे हैं। यूएई, कुवैत, कतर और बहरीन जैसे देशों में भी मिसाइल और ड्रोन की चेतावनी के चलते अलर्ट प्रणाली सक्रिय कर दी गई है। इन हमलों के परिणामस्वरूप क्षेत्रीय नागरिक जीवन प्रभावित हुआ है — एयरस्पेस बंद हो गयी है, तेल और ऊर्जा बाजार अस्थिर हैं, और वैश्विक उड़ानों में भारी रद्दीकरण चल रहा है।
आतंकित वैश्विक प्रतिक्रिया और अप्रत्याशित परिणाम
इस ऐतिहासिक लड़ाई ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भी आपात बैठक के लिए बाध्य कर दिया है। विश्व नेताओं ने क्षेत्र में तनाव कम करने की अपील की है, जबकि कुछ ने इजराइल और अमेरिका के कदमों की निंदा की है। प्रतियोगी बयानबाज़ी और राजनीतिक विभाजन गहरा होता जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, अगर खामनेई की मौत की पुष्टि पूरी तरह से हो जाती है, तो ईरान के संवैधानिक उत्तराधिकारी प्रणाली — जो पहले से ही विवादास्पद है — को कठोर परीक्षण का सामना करना पड़ेगा। इस संक्रमण के पश्चात् राजनीतिक नेतृत्व का ढाँचा बदल सकता है और यह क्षेत्रीय शक्ति समीकरण पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।