Home ताजा खबरउत्तर भारतीय संघ में गूंजा ‘जय जय महाराष्ट्र माझा’, 100 महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का संबल

उत्तर भारतीय संघ में गूंजा ‘जय जय महाराष्ट्र माझा’, 100 महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का संबल

by trilokvivechana
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मुंबई। महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर बांद्रा पूर्व स्थित टीचर्स कॉलोनी में उत्तर भारतीय संघ भवन देशभक्ति, सांस्कृतिक रंगों और सामाजिक सरोकारों से सराबोर नजर आया। उत्तर भारतीय समाज की अग्रणी संस्था उत्तर भारतीय संघ ने इस खास दिन को उत्सव के रूप में मनाते हुए न केवल सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया, बल्कि 100 जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीन भेंट कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत कदम भी दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत ‘जय जय महाराष्ट्र माझा’ की गूंज के साथ हुई, जिसने पूरे माहौल को मराठी अस्मिता और राष्ट्रीय एकता के रंग में रंग दिया। मंच पर नामी कलाकारों ने गीत, संगीत और नाटक के माध्यम से महाराष्ट्र की समृद्ध संस्कृति और विविधता को जीवंत कर दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

इस वर्ष के आयोजन की विशेष बात यह रही कि चयनित लाभार्थी महिलाओं में मराठी समाज की भागीदारी सबसे अधिक रही। कुल 100 महिलाओं में से 60 से अधिक मराठी महिलाओं को सिलाई मशीन दी गई, जो सामाजिक समरसता और सहयोग की मिसाल बनकर सामने आई।

संघ के अध्यक्ष संतोष आर एन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि “महाराष्ट्र केवल हमारी कर्मभूमि ही नहीं, बल्कि हमारी पहचान का अभिन्न हिस्सा है। जिस तरह हम अपनी जन्मभूमि से प्रेम करते हैं, उसी तरह महाराष्ट्र की मिट्टी से भी हमारा गहरा नाता है।” उन्होंने आगे कहा कि संघ हमेशा समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने और राज्य के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

समारोह में कई प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। इनमें पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह, विधायक राजहंस सिंह, भाजपा नेता अमरजीत सिंह, कार्याध्यक्ष शारदा प्रसाद सिंह, पत्रकार संघ के अध्यक्ष हेमंत तिवारी सहित अनेक सामाजिक, राजनीतिक और पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोग शामिल रहे।

कार्यक्रम का संचालन महासचिव देवेंद्र तिवारी ने प्रभावशाली ढंग से किया, जबकि अंत में संतोष आर एन सिंह ने सभी अतिथियों, सहयोगियों और उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

महाराष्ट्र दिवस के इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब सामाजिक संस्थाएं संवेदनशीलता और समर्पण के साथ कार्य करती हैं, तो वे केवल उत्सव नहीं मनातीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत नींव भी रखती हैं।

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