Home ताजा खबर‘विस्फोट के जख्म अब भी ताजा’, पीड़ितों को न्याय दिलाने सड़कों पर उतरी शिवसेना यूबीटी

‘विस्फोट के जख्म अब भी ताजा’, पीड़ितों को न्याय दिलाने सड़कों पर उतरी शिवसेना यूबीटी

by trilokvivechana
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डोंबिवली एमआईडीसी में हुए अमुदान और प्रोबेस कंपनी विस्फोटों की दर्दनाक यादें एक बार फिर शनिवार को ताजा हो गईं, जब शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने पीड़ित परिवारों को न्याय और उचित मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर जोरदार आंदोलन किया। अमुदान कंपनी के बाहर आयोजित इस आंदोलन में विस्फोट में अपनों को खो चुके परिवारों का दर्द साफ झलक रहा था।

आंदोलन का नेतृत्व कल्याण लोकसभा जिल्हाप्रमुख अभिजीत सावंत ने किया। इस दौरान अमुदान विस्फोट में मृतक रोहिणी कदम के पिता चंद्रकांत कदम और मनोज जोंधले की पत्नी सरला जोंधले सहित कई पीड़ित परिवार मौजूद रहे। बड़ी संख्या में ऐसे नागरिक भी आंदोलन में शामिल हुए, जिनकी संपत्ति विस्फोटों में क्षतिग्रस्त हुई थी।

आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि अमुदान विस्फोट को दो वर्ष और प्रोबेस कंपनी हादसे को दस वर्ष बीत जाने के बावजूद प्रभावित परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मृतकों के परिजनों को न तो पर्याप्त आर्थिक सहायता मिली और न ही जिम्मेदारों पर अपेक्षित कार्रवाई हुई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रशासन और संबंधित कंपनियों की उदासीनता ने पीड़ितों के जख्म और गहरे कर दिए हैं।

शिवसेना पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस गंभीर मुद्दे को अब राजनीतिक और विधायी स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा। आंदोलन के दौरान घोषणा की गई कि शिवसेना नेता एवं विधायक आदित्य ठाकरे को विस्तृत निवेदन सौंपा जाएगा। साथ ही एक शिष्टमंडल जल्द ही उनसे मुलाकात कर विधानसभा में यह मामला उठाने तथा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाने की मांग करेगा।

प्रदर्शन के दौरान ‘पीड़ितों को न्याय दो’, ‘दोषियों पर कार्रवाई करो’ और ‘नुकसान भरपाई तुरंत दो’ जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। आंदोलन में राजू नलावडे, सुधीर पाटील, प्रतिक पाटील, सुरेश परदेशी, किरण पाटील, जगदीश जुलूम, राजेंद्र सावंत, मंगेश मोरे और सखाराम वांद्रे सहित बड़ी संख्या में शिवसैनिक और पदाधिकारी उपस्थित रहे।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण बार-बार ऐसे हादसे हो रहे हैं, लेकिन हर बार जांच और आश्वासनों के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। ऐसे में पीड़ित परिवार अब केवल संवेदना नहीं, बल्कि ठोस न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

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