Home ताजा खबरप्याज के दाम पर सियासत गरम, चांदवड में सड़क पर उतरी महाविकास आघाड़ी

प्याज के दाम पर सियासत गरम, चांदवड में सड़क पर उतरी महाविकास आघाड़ी

by trilokvivechana
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समर्थन मूल्य 3 हजार रुपये करने की मांग, हर्षवर्धन सपकाल बोले — “किसानों को बर्बादी की ओर धकेल रही सरकार”

महाराष्ट्र के नासिक जिले का चांदवड मंगलवार को किसानों के गुस्से और विपक्ष की राजनीतिक ताकत का बड़ा केंद्र बन गया। प्याज को प्रति क्विंटल 3 हजार रुपये का समर्थन मूल्य देने की मांग को लेकर महाविकास आघाड़ी ने चांदवड चौफुली में विशाल “किसान क्रांति महामोर्चा” निकालकर राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। हजारों किसानों, कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं की मौजूदगी में हुए इस आंदोलन ने राज्य की राजनीति में प्याज संकट को फिर केंद्र में ला खड़ा किया।

महामोर्चे में महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता अंबादास दानवे, विधायक रोहित पवार, सांसद शोभाताई बच्छाव और सांसद भगरे गुरुजी समेत महाविकास आघाड़ी के कई बड़े नेता शामिल हुए। आंदोलन के दौरान रास्ता रोको प्रदर्शन भी किया गया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा और पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बन गया।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि आज प्याज उत्पादक किसान बेहद गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा और वर्तमान में प्याज मात्र 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है, जो किसानों के लिए विनाशकारी स्थिति है। सपकाल ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने प्याज खरीद की घोषणा तो कर दी, लेकिन जमीन पर अब तक खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। सपकाल ने मांग की कि प्याज की सरकारी खरीद कृषि उपज मंडी समितियों के माध्यम से तत्काल शुरू की जाए ताकि किसानों को सीधे राहत मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां किसानों के बजाय व्यापारियों को फायदा पहुंचाने वाली साबित हो रही हैं।

महामोर्चे के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और प्रशासन के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया। रास्ता रोको आंदोलन के दौरान पुलिस ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। हालांकि विपक्षी नेताओं ने साफ कहा कि किसानों की आवाज को दबाने की कोशिश सफल नहीं होगी और जब तक प्याज को उचित समर्थन मूल्य नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।

शिवसेना नेता अंबादास दानवे ने कहा कि महाराष्ट्र का किसान लगातार घाटे में खेती करने को मजबूर है और सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित रह गई है। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे और विधायक रोहित पवार ने भी आंदोलन को और व्यापक बनाने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो राज्यभर में बड़े स्तर पर किसान आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महाराष्ट्र में प्याज का मुद्दा हमेशा संवेदनशील रहा है और नासिक क्षेत्र की राजनीति में इसका सीधा असर दिखाई देता है। ऐसे में महाविकास आघाड़ी इस आंदोलन के जरिए किसानों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। वहीं सरकार के सामने अब किसानों के गुस्से को शांत करने और बाजार में गिरते प्याज भाव को नियंत्रित करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

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