
बीएमसी ने 547 डीवॉटरिंग पंपों को IoT सिस्टम से जोड़ा, जलभराव पर रियल टाइम निगरानी शुरू
मुंबई। हर मानसून में जलभराव और ट्रैफिक जाम से जूझने वाली मुंबई को इस बार तकनीक का बड़ा सहारा मिलने जा रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने शहर के जलभराव प्रभावित इलाकों में तैनात 547 डीवॉटरिंग पंपों को अब ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (IoT) आधारित स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ दिया है। इस नई व्यवस्था के जरिए पंपों की कार्यप्रणाली पर चौबीसों घंटे रियल टाइम निगरानी रखी जाएगी, जिससे भारी बारिश के दौरान त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।
महानगरपालिका आयुक्त श्रीमती अश्विनी भिडे ने शुक्रवार को आपातकालीन प्रबंधन विभाग में विकसित “डीवॉटरिंग पंप मॉनिटरिंग सिस्टम डैशबोर्ड” का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से जलभराव की समस्या से निपटने की क्षमता पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि अब प्रत्येक पंप की स्थिति, संचालन समय, तकनीकी क्षमता, चालू-बंद होने की जानकारी और पानी निकासी का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा।
बीएमसी के अनुसार, मुंबई के निचले इलाकों, रेलवे सबवे, प्रमुख सड़कों, जंक्शनों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुल 547 डीवॉटरिंग पंप तैनात किए गए हैं। इनमें शहर क्षेत्र में 146, पूर्वी उपनगरों में 178 और पश्चिमी उपनगरों में 223 पंप शामिल हैं। भारी बारिश के दौरान ये पंप जमा पानी को तेजी से नालों, ड्रेनेज लाइनों और समुद्र की ओर मोड़ने का काम करते हैं।
नई प्रणाली के तहत प्रत्येक पंप पर विशेष IoT डिवाइस लगाए गए हैं। इसके माध्यम से यह जानकारी तुरंत उपलब्ध होगी कि कौन-सा पंप कितनी देर तक चला, उसकी क्षमता क्या रही और उसने कितना पानी बाहर निकाला। यह पूरा डेटा बीएमसी के केंद्रीकृत कंट्रोल रूम में लगे लाइव डैशबोर्ड पर लगातार दिखाई देगा।
बीएमसी ने कुछ संवेदनशील स्थानों पर डिजिटल सेंसर भी लगाए हैं। यदि किसी इलाके में जलस्तर तेजी से बढ़ता है, तो कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट मिलेगा और संबंधित पंप सक्रिय कर दिए जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे आपातकालीन हालात में प्रतिक्रिया का समय काफी कम होगा।
पंप ऑपरेटरों को भी स्मार्टफोन उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे मौके की तस्वीरें और स्थिति की जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंचा सकें। साथ ही ऑपरेटरों के मोबाइल की जियो-फेंसिंग की जाएगी, जिससे उनकी मौजूदगी और कार्य की निगरानी हो सकेगी। पंप संचालन के लिए तीन शिफ्टों में कर्मचारियों की तैनाती की गई है।
आयुक्त अश्विनी भिडे ने निर्देश दिए कि यह मॉनिटरिंग डैशबोर्ड सभी प्रशासनिक विभागों के कंट्रोल रूम से भी जोड़ा जाए, ताकि संबंधित अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रख सकें।
बीएमसी का दावा है कि IoT आधारित यह आधुनिक प्रणाली मानसून के दौरान जलभराव कम करने, ट्रैफिक प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने और नागरिकों को सुरक्षित एवं तेज सेवाएं देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।