
301वीं जयंती पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया महाअभिषेक, महाराष्ट्र की समृद्धि और जनकल्याण के लिए मांगा आशीर्वाद
अहिल्यानगर। लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर की 301वीं जयंती पर उनका जन्मस्थल श्रीक्षेत्र चौंडी श्रद्धा, भक्ति और गौरव के रंग में रंग गया। ऐतिहासिक अहिल्यादेवी स्मारक और श्री अहिलेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित भव्य समारोह में देश और राज्य की अनेक प्रमुख हस्तियों ने उपस्थित होकर लोकमाता को श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा उनके अद्वितीय योगदान को स्मरण किया।
समारोह में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर जयंती समिति के स्वागताध्यक्ष एवं महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति प्रोफेसर राम शिंदे ने स्मारक स्थल पर पहुंचकर लोकमाता के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर सार्वजनिक निर्माण मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले, कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे, ग्राम विकास एवं पंचायत राज मंत्री जयकुमार गोरे, विधायक गोपीचंद पडळकर, विधायक सुरेश धस, पूर्व विधायक स्नेहलताताई कोल्हे समेत अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद श्री अहिलेश्वर मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और महाअभिषेक का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, सभापति प्रोफेसर राम शिंदे तथा अन्य मान्यवरों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर महाराष्ट्र की सुख-समृद्धि, कृषि विकास, सामाजिक कल्याण और राज्य की निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना की। मंदिर परिसर में गूंजते वैदिक मंत्रों और धार्मिक वातावरण ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि लोकमाता अहिल्यादेवी होल्कर केवल एक शासक नहीं, बल्कि जनकल्याण, न्याय और सुशासन की जीवंत प्रतीक थीं। उन्होंने अपने शासनकाल में समाज के हर वर्ग को साथ लेकर विकास का मार्ग प्रशस्त किया। महिलाओं के सम्मान, धार्मिक संरक्षण, सामाजिक समरसता और लोकहितकारी निर्णयों के कारण उनका नाम भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है।
वक्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि काशी से लेकर सोमनाथ और देश के अनेक तीर्थस्थलों के पुनर्निर्माण, घाटों, मंदिरों, धर्मशालाओं और जनोपयोगी संरचनाओं के निर्माण में उनका योगदान अतुलनीय रहा है। उनकी दूरदर्शिता और लोकसेवा की भावना आज भी प्रशासन और समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है।
समारोह के दौरान उपस्थित सभी मान्यवरों ने लोकमाता के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने, उनके विचारों को जन-जन तक ले जाने और समाजहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। चौंडी की पावन धरती पर आयोजित यह जयंती समारोह केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नारी शक्ति और आदर्श नेतृत्व के प्रति सम्मान का भव्य उत्सव बन गया।