नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। 3 सितंबर की दोपहर तक नदी का जलस्तर 207 मीटर को पार कर चुका था और शाम तक इसके 207.40 मीटर तक पहुंच जाने की संभावना जताई गई। यह स्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर है, जिससे दिल्लीवासियों की चिंता और बढ़ गई है। 2023 की भयावह बाढ़ की यादें एक बार फिर ताज़ा हो रही हैं, जब यमुना का पानी रिंग रोड तक पहुंच गया था और राजधानी का बड़ा इलाका झील जैसा हो गया था।
निचले इलाकों में पानी घुसा, हजारों लोग प्रभावित
इस बार भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। यमुना किनारे बसे निचले इलाकों में पानी भर चुका है। कई घरों में 3 से 4 फीट तक पानी घुस गया है, जबकि कुछ घर तो पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। स्थानीय प्रशासन ने अब तक करीब 10 हजार लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है, लेकिन हालात पर काबू पाना आसान नहीं लग रहा। कई परिवार अपने घरों से जरूरी सामान और मवेशी लेकर सुरक्षित ठिकानों की ओर जा रहे हैं। मोनास्ट्री मार्केट का मुख्य द्वार और मेन रोड पानी में डूब चुका है। यहां से होकर पानी अब मेन मार्केट तक पहुंच गया है। ISBT कश्मीरी गेट क्षेत्र भी पानी की चपेट में आ चुका है। नतीजतन ISBT से तीस हजारी जाने वाला मार्ग पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
अक्षरधाम और मयूर विहार में NDRF तैनात
दिल्ली सरकार ने हालात से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को तैनात कर दिया है। अक्षरधाम, मयूर विहार, यमुना बाजार और ISBT क्षेत्र में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। NDRF के जवान नावों और मोटरबोट के सहारे फंसे हुए लोगों को निकाल रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बल तैनात किए जाएंगे।
निगम बोध घाट पर संकट, अंतिम संस्कार ठप
यमुना के बढ़ते जलस्तर ने राजधानी के धार्मिक और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। निगम बोध घाट, जहां प्रतिदिन सैकड़ों शवों का अंतिम संस्कार होता है, वहां अब पानी भर चुका है। करीब 1 से 1.5 फीट तक पानी उस स्थान तक पहुंच गया है जहां चिताएं जलाई जाती हैं। इससे शवों का अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो गया है। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने शाम 6 बजे से निगम बोध घाट को बंद करने का आदेश दे दिया है। यह स्थिति मृतकों के परिजनों के लिए गहरी परेशानी का कारण बन गई है।
हथिनीकुंड और वजीराबाद से लगातार छोड़ा जा रहा पानी
यमुना का जलस्तर बढ़ने की मुख्य वजह उत्तर भारत के बैराजों से छोड़ा जा रहा पानी है। केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अधिकारियों के अनुसार, हर घंटे हथिनीकुंड और वजीराबाद बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। इसके चलते यमुना में लगातार पानी का बहाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पानी छोड़ने की रफ्तार ऐसे ही जारी रही तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। वासुदेव घाट और अन्य आरती स्थलों पर भी पानी भर गया है। यहां के स्थानीय लोग अपनी जरूरत का सामान लेकर पहले ही सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। मंदिरों और घाटों पर बाढ़ का पानी भरने से धार्मिक गतिविधियाँ भी प्रभावित हो रही हैं।
जलस्तर बढ़ने का पैमाना
दिल्ली में यमुना का डेंजर लेवल पुराने रेलवे ब्रिज पर लगे मीटर से मापा जाता है। यहां जलस्तर 205.33 मीटर होने पर खतरे का निशान पार माना जाता है। 3 सितंबर को दोपहर 1 बजे तक ही यमुना का जलस्तर 207 मीटर तक पहुंच गया था। शाम तक इसके 207.40 मीटर तक पहुंचने की संभावना जताई गई। यह आंकड़ा खतरे के निशान से लगभग 2 मीटर अधिक है, जो स्थिति की गंभीरता को साफ दिखाता है।
प्रशासन अलर्ट पर
दिल्ली सरकार ने बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए आपात योजना लागू कर दी है। उपमुख्यमंत्री समेत कई वरिष्ठ अधिकारी हालात पर नज़र बनाए हुए हैं। राहत शिविर स्थापित किए जा रहे हैं, जहां प्रभावित लोगों को भोजन, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में कोई महामारी न फैले।
दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने चेतावनी जारी की है कि लोग यमुना किनारे बसे इलाकों में न जाएं। जिन घरों में पानी घुस चुका है, वहां से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।
2023 की यादें ताज़ा
गौरतलब है कि 2023 में भी यमुना का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ गया था। उस समय रिंग रोड तक पानी पहुंच गया था और राजधानी के कई हिस्से पूरी तरह से डूब गए थे। दिल्ली की सड़कें तालाब जैसी लग रही थीं और यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई थी। लोग कई दिनों तक अपने घरों से बाहर नहीं निकल पाए थे। इस बार भी हालात उसी दिशा में बढ़ते नजर आ रहे हैं।
नागरिकों में दहशत
यमुना का जलस्तर बढ़ने से दिल्लीवासियों में भय का माहौल है। प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कहना है कि हर साल बाढ़ की समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया। लोग प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं ताकि बार-बार ऐसे हालात का सामना न करना पड़े।
विशेषज्ञों की चेतावनी
जल विशेषज्ञों का कहना है कि यमुना नदी के किनारों पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण बाढ़ की समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि निचले इलाकों से लोगों का स्थायी पुनर्वास किया जाए और यमुना के जल प्रवाह को अवरुद्ध करने वाले अवैध ढांचों को हटाया जाए। साथ ही बैराज से छोड़े जाने वाले पानी का वैज्ञानिक प्रबंधन जरूरी है, ताकि अचानक से राजधानी में बाढ़ जैसी स्थिति न बने। फिलहाल दिल्ली की स्थिति नाजुक बनी हुई है। यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और हजारों लोग पहले ही प्रभावित हो चुके हैं। NDRF और प्रशासन लगातार बचाव कार्य में जुटे हुए हैं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। यदि पानी का स्तर और बढ़ा, तो रिंग रोड समेत राजधानी के कई अहम हिस्से डूब सकते हैं, जिससे हालात और भी गंभीर हो जाएंगे। राजधानी के लिए यह समय सतर्कता और धैर्य का है। प्रशासन और नागरिक मिलकर ही इस संकट से पार पा सकते हैं। परंतु यह भी जरूरी है कि भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचने के लिए ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाए जाएं, ताकि दिल्ली हर साल यमुना की बाढ़ से जूझने के लिए मजबूर न हो।
