नई दिल्लीः राजधानी दिल्ली और एनसीआर में बीते दो दिनों से प्रदूषण स्तर खतरनाक स्तर से भी ऊपर पहुंच गया है, जिससे सांसों पर संकट और गंभीर हो गया है। अस्पतालों में खांसी, आंखों में जलन, गले में खराश, सिरदर्द, थकान और बुखार जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। खासतौर पर सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के मरीज अस्पतालों में सबसे ज्यादा देखे जा रहे हैं।
एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि पिछले 48 घंटों में ओपीडी में सांस के मरीजों की संख्या 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। कई मरीजों को तत्काल भर्ती करने की जरूरत पड़ी है। प्रदूषण के गंभीर स्तर को देखते हुए एम्स के पल्मोनरी विभागाध्यक्ष डॉ. अनंत मोहन ने दिल्ली-एनसीआर में हेल्थ इमर्जेंसी घोषित होने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि “ऐसे हालात पहले कभी नहीं बने। प्रदूषण अपने चरम पर है और इसके प्रभाव बेहद खतरनाक हो सकते हैं। जब तक सरकार इसे हेल्थ इमर्जेंसी मानकर कठोर कदम नहीं उठाती, स्थिति नियंत्रण से बाहर रह सकती है।”
राजधानी में कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 700 के पार पहुंच गया है, जो ‘गंभीर प्लस’ श्रेणी में आता है। हालांकि दिल्ली में ग्रेप-4 (GRAP-4) लागू है, इसके बावजूद हवा की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं दिख रहा।
स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि पल्मोनरी विशेषज्ञ अब मरीजों को कुछ दिनों के लिए दिल्ली-एनसीआर छोड़ने की सलाह दे रहे हैं, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा तथा सीओपीडी से पीड़ित लोगों को।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण का स्तर इसी तरह बना रहा, तो अगले कुछ दिनों में मरीजों की संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने तुरंत प्रभावी कदम उठाने और जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की है।
