मुंबई। सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियन की रहस्यमयी मौत को लेकर एक बार फिर सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि घटना को पांच साल बीत जाने के बावजूद अब तक जांच रिपोर्ट दिशा के पिता को क्यों नहीं सौंपी गई। अदालत ने सवाल उठाया कि जब एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, तो यह तय करने में इतनी लंबी देरी क्यों हो रही है कि मामला आत्महत्या का है या गैर-इरादतन हत्या का।
न्यायमूर्ति एएस गडकरी और न्यायमूर्ति रंजीतसिंह राजा भोंसले की खंडपीठ ने दिशा के पिता सतीश सालियन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “पूछताछ अब तक क्यों जारी है? अब पांच साल हो चुके हैं। एक व्यक्ति की मौत हो गई है। आपको यह तय करना होगा कि यह आत्महत्या थी या गैर इरादतन हत्या।”
याचिका में गंभीर आरोप
सतीश सालियन ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी दिशा के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई, जबकि पुलिस ने मामले को दबाने का काम किया। याचिका में यह भी कहा गया है कि राजनेताओं और प्रभावशाली हस्तियों के दबाव में सच्चाई को छुपाया गया और जांच को गलत दिशा में मोड़ा गया।
याचिकाकर्ता ने अदालत से कई अहम राहतों की मांग की है। इसमें दिसंबर 2023 में राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे मामले की जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की मांग प्रमुख है।
मालवणी पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट का हवाला
मालवणी पुलिस थाने द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दिशा सालियन, जो दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं, ने 8 जून 2020 को एक आवासीय इमारत की 14वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस के मुताबिक, जांच में किसी साजिश या हत्या के कोई ठोस सबूत नहीं मिले थे।
हालांकि, सालियन परिवार इस निष्कर्ष से संतुष्ट नहीं है और लगातार मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।
जांच से जुड़े दस्तावेज नहीं सौंपने का आरोप
अपनी याचिका में सतीश सालियन ने यह भी आरोप लगाया कि जांच अधिकारियों ने उनके साथ मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य साझा नहीं किए। इनमें अंतिम जांच रिपोर्ट, पुलिस द्वारा एकत्रित सामग्री, तस्वीरें, वीडियो, पंचनामा, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, फोरेंसिक रिपोर्ट, दिशा का मोबाइल फोन और लैपटॉप, पोस्टमार्टम रिपोर्ट जैसी अहम चीजें शामिल हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इन दस्तावेजों के बिना वह न तो निष्पक्षता से जांच की स्थिति को समझ सकते हैं और न ही कानूनी लड़ाई को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकते हैं।
सरकार की दलील
गुरुवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुई सरकारी वकील मानकुंवर देशमुख ने अदालत को बताया कि दिशा सालियन की मौत की जांच अब भी जारी है और सभी संभावित पहलुओं पर गहनता से विचार किया जा रहा है ताकि किसी भी संभावना को नजरअंदाज न किया जाए।
देशमुख ने यह भी दलील दी कि अधिकारियों ने कई बार दिशा के माता-पिता के बयान दर्ज किए थे और उस समय उन्होंने उसकी मौत को लेकर कोई संशय व्यक्त नहीं किया था। सरकारी वकील के अनुसार, पांच साल बाद अचानक उठ रहे संदेह कई सवाल खड़े करते हैं।
हाईकोर्ट का सख्त रुख
हालांकि, अदालत सरकार की इस दलील से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आई। खंडपीठ ने जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने में हुई देरी पर तीखी टिप्पणी की और राज्य से स्पष्ट जवाब मांगा। अदालत ने यह भी संकेत दिए कि इतनी लंबी अवधि तक जांच को लंबित रखना न तो पीड़ित परिवार के हित में है और न ही न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए उचित।
राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज
दिशा सालियन का मामला पहले भी कई बार राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। समय-समय पर इस मामले को लेकर नए आरोप, सवाल और जांच की मांग उठती रही है। हाईकोर्ट की ताजा फटकार के बाद एक बार फिर यह मामला केंद्र में आ गया है और राज्य सरकार पर पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार जल्द से जल्द दिशा सालियन की जांच रिपोर्ट उनके पिता को सौंपती है या नहीं, और क्या यह मामला आगे चलकर सीबीआई के हाथों में जाता है। हाईकोर्ट की सख्ती ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में अब और देरी न्याय के हित में नहीं होगी।
