बाढ़ की विभीषिका के बीच जन्मी नई उम्मीद : ट्रैक्टर-ट्रॉली में गूंजी बच्चे की किलकारी; तो वहीं रखा गया नवजात का ‘सैलाब सिंह’ नाम

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ ने जीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार बारिश और नदियों के उफान ने गांवों से लेकर कस्बों तक हर जगह हालात बिगाड़ दिए हैं। खेत-खलिहान डूब गए हैं, घरों में पानी भर गया है और आवागमन के साधन लगभग ठप पड़ गए हैं। लोग ऊंचे स्थानों और अस्थायी आश्रयों में शरण लेने को मजबूर हैं, लेकिन इसी विकट स्थिति के बीच मातृत्व की संवेदनशील और साहसिक कहानियां सामने आई हैं। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो गया है, ऐसे में उन्हें मजबूरी में बिना चिकित्सकीय सुविधा के भी प्रसव करना पड़ रहा है। इन घटनाओं ने जहां लोगों की चिंता बढ़ाई है, वहीं जीवन की जिजीविषा और नई उम्मीद की मिसाल भी कायम की है।

पीलीभीत जिले के बड़ेपुरा धर्मा गांव में बाढ़ के बीच एक महिला ने बेटे को जन्म दिया और परिवार ने हालात को देखते हुए उसका नाम ‘सैलाब सिंह’ रखा। पानी से घिरे और चारों तरफ संकट से जूझते इस गांव में बच्चे का जन्म किसी आश्चर्य से कम नहीं माना गया। स्थानीय लोग कहते हैं कि बच्चे का नाम मौजूदा स्थिति को देखते हुए रखा गया है, ताकि आने वाले वर्षों में भी यह कठिन दौर और उससे मिली हिम्मत की याद बनी रहे।

लखीमपुर खीरी जिले के रंडुवा गांव में तो हालात और भी गंभीर रहे। यहां की निवासी शीला निषाद को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो परिवार ने उसे अस्पताल ले जाने का प्रयास किया। चारों तरफ पानी फैला हुआ था और सड़कें डूबी हुई थीं, इसलिए अस्पताल तक पहुंचना बेहद कठिन हो गया। ऐसे में एक स्थानीय निवासी की मदद से ट्रैक्टर-ट्रॉली का इंतजाम किया गया, लेकिन रास्ते की दुश्वारियों ने सफर रोक दिया। प्रसव पीड़ा तेज होने पर परिवारजन ने ट्रॉली के भीतर ही अस्थायी व्यवस्था की और शीला ने बाढ़ के बीच अपने बच्चे को जन्म दिया। बाद में प्रशासन की मदद से एम्बुलेंस पहुंची और मां-बच्चे दोनों को फूलबेहड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि दोनों सुरक्षित हैं।

स्थिति का जायजा लेने पहुंचे उप जिलाधिकारी राजीव कुमार निगम ने कहा कि प्रशासन लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दवाइयां और चिकित्सकीय मदद पहुंचा रहा है। इसके लिए नावों की व्यवस्था की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता दी जा सके। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी।

इसी तरह का एक और मार्मिक मामला बिजनौर जिले के रायपुर खादर गांव से सामने आया। यहां जोनी सिंह की पत्नी रूपा को प्रसव पीड़ा हुई, लेकिन चारों तरफ पानी भरने के कारण परिवार उसे अस्पताल ले जाने का जोखिम नहीं उठा सका। पूरी रात महिला दर्द सहती रही, और परिवारजन प्रशासन से मदद की गुहार लगाते रहे। अंततः राहत टीम नाव लेकर गांव पहुंची और उसे सुरक्षित निकालकर जलीलपुर के अस्पताल ले गई। वहां उसने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।

इन घटनाओं ने दिखा दिया है कि बाढ़ जैसी आपदाओं के बीच भी जीवन थमता नहीं है। संकट के बीच जन्मी मासूम किलकारियां लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बन गई हैं। जहां एक ओर बाढ़ ने जनजीवन को पंगु बना दिया है, वहीं दूसरी ओर इन कठिन परिस्थितियों में जन्म लेने वाले शिशुओं की कहानियां साहस और जीवन शक्ति की गवाही दे रही हैं। इन बच्चों का जन्म केवल परिवारों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए संदेश है कि कठिनाइयों के बीच भी जीवन आगे बढ़ता है।

प्रशासनिक स्तर पर बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में लगातार मदद पहुंचाई जा रही है, फिर भी हालात से निपटना आसान नहीं है। नावों के जरिए दवाइयां और राहत सामग्री पहुंचाई जा रही हैं, अस्थायी आश्रय गृह बनाए गए हैं और चिकित्सा सेवाओं को सुचारु रखने की कोशिश हो रही है। हालांकि, जिन परिस्थितियों में महिलाओं को प्रसव के लिए मजबूर होना पड़ा, उसने स्वास्थ्य सेवाओं की सीमाओं को उजागर किया है। इसके बावजूद, इन घटनाओं से यह भी सिद्ध होता है कि ग्रामीण समाज ने संकट में भी धैर्य और सहयोग की भावना को बनाए रखा है।

उत्तर प्रदेश में बाढ़ की आपदा फिलहाल लोगों के लिए कठिनाई का कारण बनी हुई है, लेकिन इसके बीच जीवन की नई शुरुआत ने सबको आश्चर्यचकित और भावुक कर दिया है। ‘सैलाब सिंह’ जैसे नामकरण और ट्रैक्टर-ट्रॉली में गूंजी मासूम किलकारी इस आपदा की यादों के साथ लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में दर्ज रहेंगे। यह घटनाएं साबित करती हैं कि प्रकृति की आपदाएं चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, जीवन अपनी राह ढूंढ ही लेता है और नई पीढ़ी के साथ आगे बढ़ता है।

Related posts

दोस्ती बनी दुश्मनी का कारण, 15 वर्षीय किशोर ने 17 साल के साथी की ली जान

उद्धव ठाकरे को लोकसभा में बड़ा झटका! छह सांसदों ने बनाया अलग गुट, शिंदे सेना में विलय की अटकलों से सियासत गरम

BEST कर्मचारियों की आर-पार की लड़ाई, आज से अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान