Home राजनीतिराज्यआंध्र प्रदेशसमधी ने बसपा सुप्रीमो मायावती से मांगी माफी, होगी वापसी! पंचायत चुनाव से पहले बढ़ा रही कुनबा

समधी ने बसपा सुप्रीमो मायावती से मांगी माफी, होगी वापसी! पंचायत चुनाव से पहले बढ़ा रही कुनबा

by admin
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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बार फिर घर वापसी का दौर शुरू होने जा रहा है। पार्टी सुप्रीमो मायावती के भतीजे और राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद के ससुर एवं पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ ने मायावती से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर बीते दिनों हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना की और पार्टी अनुशासन में रहकर काम करने का संकल्प जताया।

फर्रुखाबाद निवासी अशोक सिद्धार्थ ने अपने पोस्ट की शुरुआत मायावती को “चरण स्पर्श” लिखकर की। इसके बाद उन्होंने लिखा कि “पार्टी का कार्य करते समय जाने-अनजाने और गलत लोगों के बहकावे में आकर मुझसे जो गलतियां हुई हैं, उसके लिए बसपा सुप्रीमो से हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं। आगे कभी ऐसी गलती नहीं करूंगा और पूरी निष्ठा से पार्टी अनुशासन का पालन करूंगा।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे कभी भी रिश्तेदारी का नाजायज फायदा नहीं उठाएंगे और न ही उन लोगों के लिए सिफारिश करेंगे जिन्हें पार्टी अनुशासनहीनता के चलते निकाला गया है। सिद्धार्थ ने खास तौर पर उल्लेख किया कि महाराष्ट्र के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संदीप ताजने और फिरोजाबाद के हेमंत प्रताप समेत अन्य निकाले गए नेताओं के लिए वे अब कभी वापसी की मांग नहीं करेंगे।

वापसी लगभग तय
राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि अशोक सिद्धार्थ की वापसी का रास्ता लगभग साफ हो चुका है। सूत्रों के अनुसार, अगली पार्टी बैठक में या उससे पहले ही उनका पुनः शामिल होना संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि बसपा फिलहाल दलित युवाओं के चंद्रशेखर उर्फ रावण की ओर बढ़ते आकर्षण से चिंतित है। ऐसे में मायावती अब पंचायत चुनाव के जरिये अपना कुनबा मजबूत करने और संगठन को नए सिरे से धार देने की तैयारी कर रही हैं।

मायावती की रणनीति

मायावती अपने कड़े और अप्रत्याशित फैसलों के लिए जानी जाती हैं। संगठन और प्रत्याशी चयन से लेकर चुनावी रणनीति तक, जब तक निर्णय लागू नहीं हो जाता, तब तक उनके कदम का अनुमान लगाना कठिन होता है। हालांकि, सूत्र बताते हैं कि अब उनकी रणनीति बिखरे हुए पुराने बसपाइयों को जोड़ने और दूसरे दलों में जा चुके नेताओं की वापसी कराने की है। यदि पंचायत चुनाव में यह प्रयोग सफल हुआ तो माना जा रहा है कि 2027 विधानसभा चुनाव में बसपा की वापसी दिलचस्प मोड़ ले सकती है।

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