मनोरंजन की दुनिया में अपनी हास्य प्रतिभा और तुनकमिज़ाजी अंदाज़ से लाखों दिल जीतने वाले किकु शारदा अब छोटे पर्दे पर एक बिल्कुल नए किरदार में नज़र आ रहे हैं। अशनीर ग्रोवर की मेजबानी वाले बहुचर्चित शो ‘राइज़ एंड फॉल’ के पहले ही एपिसोड में किकु ने अपने अनोखे अंदाज़ से दर्शकों को बाँध लिया। शुरुआत मज़ाक-मस्ती और ठहाकों से हुई, लेकिन जल्द ही खेल ने गंभीर रूप ले लिया और किकु शारदा सबको पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल कर बैठे।
पहली ही चुनौती के तौर पर प्रतियोगियों के सामने आया लाल कमरा फ़ैसला। यहाँ प्रतिभागियों को अपनी रणनीति, समझदारी और आपसी विश्वास की परख देनी थी। इस दौर में दो बक्से रखे गए थे—एक चमकदार सुनहरा बक्सा जिसमें छिपे थे पूरे पाँच लाख रुपये, और दूसरा चाँदी का बक्सा, जिसमें केवल एक लाख। इस चुनौती में किकु शारदा का मुकाबला पत्रकार नयंदादीप रख्शित और पहलवान संगीता फोगाट से हुआ।
तनाव से भरे इस खेल में हर नज़र बक्सों पर टिकी थी। निर्णायक क्षण पर नयंदादीप और संगीता ने आपसी सहमति से सुनहरा बक्सा किकु शारदा को सौंप दिया। यही निर्णय शो की दिशा बदल गया। किकु न केवल पाँच लाख रुपये के मालिक बने बल्कि ‘राइज़ एंड फॉल’ के पहले शासक की गद्दी भी उन तक पहुँची। इस जीत ने उन्हें आलीशान भवन में रहने का अधिकार और कुछ समय तक प्रतियोगिता से बाहर निकाले जाने से सुरक्षा भी दिला दी।
किकु ने इस गंभीर माहौल में भी अपनी चिर-परिचित चंचलता और हँसमुख स्वभाव को बरकरार रखा। उनकी मज़ेदार टिप्पणियाँ, हल्की-फुल्की नोक-झोंक और स्वाभाविक हाजिरजवाबी ने माहौल को हल्का किया। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी साबित किया कि वे केवल हँसी-मज़ाक के खिलाड़ी नहीं बल्कि रणनीति और भरोसे के प्रतीक भी हैं।
शो के पहले ही दिन का अंत बेहद दिलचस्प रहा। जहाँ किकु शासकीय ठाठ-बाट में आनंद ले रहे थे, वहीं बाकी प्रतिभागी तंग तहख़ाने में संघर्ष की राह पर नज़र आए। इस विपरीत स्थिति ने खेल में रोमांच और बढ़ा दिया।
अब दर्शकों की निगाहें इस सवाल पर टिकी हैं कि क्या किकु शारदा का यह सुनहरा सफर उन्हें लगातार ऊँचाइयों तक पहुँचाएगा या फिर आने वाले दिनों में यही शुरुआत उनके लिए कठिन चुनौती बन जाएगी। एक बात तो तय है कि ‘राइज़ एंड फॉल’ में किकु की मौजूदगी ने पहले ही दिन शो को चर्चा का केंद्र बना दिया है।
