बाराबंकी में संदिग्ध हालात में 14 बंदरों की मौत, जहर देने की आशंका

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के अमसेरुआ गांव में शनिवार को एक हैरान करने वाला मामला सामने आया, जहां 14 बंदरों के शव संदिग्ध परिस्थितियों में पाए गए। वन विभाग और पुलिस को आशंका है कि इन बंदरों को जहर देकर मारा गया है। घटना के बाद से गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल है। अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है।


कैसे मिला मामला?

स्थानीय ग्रामीणों ने सबसे पहले खेतों और गांव के आसपास बंदरों के शव पड़े होने की सूचना दी। पहले पांच शव बरामद हुए, लेकिन थोड़ी देर बाद गांव के ही दूसरे हिस्से से पांच और शव मिले। जांच के दौरान कुल 14 बंदरों के मृत होने की पुष्टि हुई। एक बंदर गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला, जिसे तुरंत पशु चिकित्सालय भेजा गया।


जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट

मृत बंदरों का पोस्टमार्टम किया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट में बंदरों के मुंह में गेहूं और चने के अवशेष पाए गए हैं, जिससे संदेह गहराया है कि उन्हें जहरीला दाना खिलाया गया होगा। सभी मृत बंदरों का विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि पुष्टि होती है कि जानबूझकर जहर दिया गया, तो आरोपियों पर कठोर धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।


पुलिस और वन विभाग की सक्रियता

मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। हरख वन क्षेत्र के रेंजर मोहित श्रीवास्तव ने बताया कि मृत बंदरों में आठ नर और छह मादा शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद इस घटना को लेकर और गंभीर धाराओं में कार्रवाई हो सकती है। थाना प्रभारी अमित सिंह भदोरिया ने कहा कि गांव की ओर जाने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है। इसके अलावा, ग्रामीणों से भी लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि पता लगाया जा सके कि बंदरों को जहर किसने और क्यों दिया।


ग्रामीणों में आक्रोश

इस घटना के बाद से गांव में लोगों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदर अक्सर खेतों में फसल को नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन उन्हें इस तरह से मारना अमानवीय है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द दोषियों का पता लगाया जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।


वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन

विशेषज्ञों का कहना है कि बंदरों को मारना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का गंभीर उल्लंघन है। यदि यह साबित होता है कि जानबूझकर जहर देकर उनकी हत्या की गई है, तो दोषियों को कठोर सजा मिल सकती है। वन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा।


आगे की कार्रवाई

फिलहाल पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें जांच में जुटी हैं। आसपास के इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही दोषियों की पहचान कर उन्हें कानून के हवाले किया जाएगा।

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