घाटकोपर हादसे की अनदेखी कर सरकारी खजाना भरने में जुटी सरकार, पढ़ें पूरी खबर

मुंबई। राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति इन दिनों बेहद खराब दौर से गुजर रही है। राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार लगातार नए-नए रास्ते तलाश रही है। लेकिन इस बार उठाया गया कदम न केवल विवादों में है बल्कि जनता के लिए चिंता का विषय भी बन गया है। सरकार ने फैसला लिया है कि अब खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर विज्ञापन होर्डिंग्स लगाने की अनुमति दी जाएगी। गौर करने वाली बात यह है कि यह निर्णय उस समय लिया गया है जब कुछ ही महीने पहले घाटकोपर में एक विशाल होर्डिंग गिरने से 17 लोगों की जान गई थी। हादसे की जांच रिपोर्ट सरकार के पास पहुंच चुकी है, लेकिन उसके सुझावों को लागू करने की बजाय सरकार ने राजस्व बढ़ाने की दिशा में होर्डिंग नीति को आगे बढ़ा दिया है।

सरकारी जमीनों पर होर्डिंग लगाने की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, विज्ञापन कंपनियों की लंबे समय से यह मांग रही है कि उन्हें सरकारी जमीनों पर होर्डिंग लगाने की अनुमति दी जाए। अब सरकार ने उनकी मांग पूरी करने का फैसला कर लिया है। जिलाधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में ऐसी खाली पड़ी सरकारी जमीनों की पहचान करें, जहां होर्डिंग्स लगाई जा सकें। इसके बाद इन जमीनों को ई-नीलामी प्रक्रिया के जरिए विज्ञापन कंपनियों को लीज पर दिया जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि इस कदम से राजस्व में बड़ा इजाफा होगा। अभी तक खाली पड़ी इन जमीनों का कोई उपयोग नहीं हो रहा था, लेकिन अब इन्हें व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल कर सरकार को आय का नया स्रोत मिलेगा।

नीति को लेकर सवाल

राज्य के राजस्व और वन विभाग ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, फिलहाल पूरे राज्य में इस संबंध में एक समान नीति तय नहीं की गई है। अलग-अलग जगहों पर होर्डिंग लगाने के लिए कितना लाइसेंस शुल्क वसूला जाएगा, इसका कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं है। यही वजह है कि विशेषज्ञों का मानना है कि बिना ठोस नीति और सुरक्षा मानकों के होर्डिंग लगाने की यह योजना भविष्य में बड़े खतरे खड़े कर सकती है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में विज्ञापनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने खासकर मुंबई और उसके उपनगरों में इस योजना को लागू करने का फैसला लिया है। महानगरों में विज्ञापन कंपनियों को सबसे ज्यादा लाभ होने की संभावना है, जिससे सरकार को भारी भरकम राजस्व मिलने की उम्मीद है।

घाटकोपर हादसा और जांच रिपोर्ट

कुछ ही महीने पहले मुंबई के घाटकोपर इलाके में एक भारी-भरकम होर्डिंग गिरने से बड़ा हादसा हुआ था। इस दुर्घटना में 17 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। इस घटना ने प्रशासन और सरकार की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी थी। हादसे के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंप दी है। रिपोर्ट में होर्डिंग लगाने के नियम-कायदों और सुरक्षा उपायों को लेकर अहम सुझाव दिए गए हैं। हालांकि, अब तक सरकार ने इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है और न ही इसमें सुझाए गए उपायों को लागू करने की दिशा में कोई कदम उठाया है। इसके विपरीत, सरकार ने होर्डिंग्स लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने का रास्ता खोल दिया है।

जनता की नाराजगी

सरकार के इस कदम पर आम जनता और नागरिक संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि घाटकोपर हादसे से कोई सबक नहीं लिया गया है। जब तक सुरक्षा मानक तय नहीं होते और निगरानी प्रणाली मजबूत नहीं की जाती, तब तक सरकारी जमीनों पर बड़े पैमाने पर होर्डिंग लगाने की अनुमति देना लोगों की जान से खिलवाड़ करने जैसा है।

लोगों ने यह भी सवाल उठाए हैं कि सरकार ने जांच समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं किया। अगर रिपोर्ट में सुरक्षा से जुड़े अहम सुझाव दिए गए हैं, तो उन्हें लागू करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए थी। लेकिन सरकार ने इसके उलट कदम उठाया और राजस्व बढ़ाने के लिए जनता की सुरक्षा को दरकिनार कर दिया।

राजस्व बनाम सुरक्षा

स्पष्ट है कि आर्थिक संकट से जूझ रही सरकार ने राजस्व जुटाने के लिए यह नया रास्ता चुना है। लेकिन सवाल यह है कि क्या खजाना भरना जनता की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण है? घाटकोपर हादसे जैसी त्रासदी को भूलकर सरकार ने जो रास्ता अपनाया है, वह आने वाले समय में फिर किसी बड़े हादसे की वजह बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्डिंग नीति को लागू करने से पहले सरकार को सख्त सुरक्षा नियम तय करने होंगे और उनके पालन की पुख्ता व्यवस्था करनी होगी। जब तक ऐसा नहीं किया जाता, तब तक सरकारी जमीनों पर होर्डिंग लगाने का फैसला लोगों के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है।

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