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यूपी में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ा, जुमा दर जुमा हो रही है भड़काऊ नारेबाजी

by admin
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य का सामाजिक और धार्मिक माहौल संवेदनशील हो गया है। शुक्रवार को भदोही और कौशांबी जिलों में जुमा की नमाज के दौरान युवकों द्वारा भड़काऊ नारे लगाना, ‘सिर तन से जुदा’ और फ़िलस्तीन का झंडा लहराना, राज्य में साम्प्रदायिक तनाव की संभावना को बढ़ा गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

भदोही जिले में शुक्रवार की सुबह जुमा की नमाज के दौरान एक समूह ने ‘सिर तन से जुदा’ जैसे भड़काऊ नारे लगाए। इस दौरान फ़िलस्तीन का झंडा भी झंडावंद किया गया। सूचना मिलने पर पुलिस ने सख्त रुख अपनाया और लगभग डेढ़ दर्जन युवकों को हिरासत में लिया। पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि सोशल मीडिया पर जिले के औराई और भदोही नगर में फ़िलस्तीन का झंडा लहरा जाने और भड़काऊ नारे लगाए जाने की खबरें वायरल हो रही थीं। उन्होंने चेताया कि इससे आपसी भाईचारा और कानून व्यवस्था को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। भदोही में गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ जारी है और चार दर्जन अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने साफ किया कि कानून व्यवस्था के खिलाफ किसी भी तरह की हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कौशांबी में भी भड़काऊ नारेबाजी

उसी दिन कौशांबी जिले के मंझनपुर कस्बे में एक अन्य भड़काऊ घटना सामने आई। शुक्रवार की शाम मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग जुलूस निकालते हुए ‘गुस्ताखे नबी की एक सजा, सिर तन से जुदा’ जैसे नारे लगा रहे थे। जुलूस ने जामा मस्जिद से लेकर नेहरू नगर तक हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की। इस दौरान किए गए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इसके बाद हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई और पुलिस को शिकायत की। कौशांबी पुलिस ने 15 से 20 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ अपराध संख्या 308/25 धारा 223,196 बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस सूत्रों के अनुसार मामले की जांच जारी है और आरोपी जल्द ही गिरफ्तारी के दायरे में आ सकते हैं।

पहले की घटनाओं का संज्ञान

इससे पहले 13 सितंबर को शाहजहांपुर जिले में एक व्यक्ति के सोशल मीडिया पोस्ट के कारण साम्प्रदायिक तनाव उत्पन्न हुआ था। के. के. दीक्षित नामक युवक ने धर्म विशेष और पैगंबर साहब के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की। पोस्ट वायरल होने के बाद सदर बाजार थाना क्षेत्र में माहौल तनावपूर्ण हो गया। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन मुस्लिम समुदाय के हजारों लोग थाने के सामने जमा हो गए और प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जिससे पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान कई लोग भाग गए और जूते-चप्पल तथा बाइक छोड़कर सुरक्षित स्थान पर चले गए। इससे पहले 22 अगस्त को बरेली में आला हजरत उर्स के दौरान ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाने वाले समूह के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। 20 अज्ञात व्यक्तियों ने गुस्ताखे नबी के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाकर साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। प्रशासन ने तुरंत स्थिति को नियंत्रण में लिया और किसी बड़ी घटना को टालने में सफलता पाई।

पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

भदोही और कौशांबी में दोनों ही घटनाओं में पुलिस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। अधिकारियों ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी भी तरह के साम्प्रदायिक तनाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भदोही पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने कहा, “सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री और झंडा लहराने जैसी घटनाओं से आपसी भाईचारा बिगड़ सकता है। हमने हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। किसी भी तरह के कानून व्यवस्था के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” कौशांबी के पुलिस सूत्रों ने बताया कि जुलूस निकालने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है और मामले की गहन जांच की जा रही है। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह के भड़काऊ नारे या साम्प्रदायिक गतिविधियों से दूर रहें और कानून का सम्मान करें।

चुनावी समय में संवेदनशील माहौल

विशेषज्ञों का कहना है कि यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इस तरह की घटनाओं का बढ़ना चिंता का विषय है। यदि भड़काऊ नारे और साम्प्रदायिक झड़पों पर नियंत्रण नहीं रखा गया, तो राज्य में व्यापक तनाव फैल सकता है।

सामाजिक कार्यकर्ता और विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ानी चाहिए, सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट और वीडियो को मॉनिटर करना चाहिए और कानून का सख्ती से पालन कराना चाहिए। इससे चुनावी माहौल शांत और सुरक्षित बनाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश के भदोही और कौशांबी में शुक्रवार को हुई भड़काऊ नारेबाजी और फ़िलस्तीन झंडा लहराने जैसी घटनाओं ने राज्य में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने की संभावना को बढ़ाया है। पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को राज्य के अन्य हिस्सों में भी सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि चुनावी माहौल शांतिपूर्ण और सुरक्षित बना रहे।

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