देश के रियल एस्टेट सेक्टर में लगातार बढ़ती कीमतों का सीधा असर उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता पर पड़ता दिखाई दे रहा है। ‘एनारॉक ग्रुप’ द्वारा जारी ताज़ा तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में सात प्रमुख महानगरों में घरों की बिक्री पिछले साल की तुलना में 9 प्रतिशत घटी है। इस गिरावट का सबसे अधिक असर मुंबई और पुणे जैसे बड़े बाजारों पर पड़ा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई में घरों की बिक्री में 16 प्रतिशत और पुणे में 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, हैदराबाद और दिल्ली में भी 11-11 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।
मुंबई और पुणे: सबसे बड़ी हिस्सेदारी, लेकिन गहरी गिरावट
मुंबई और पुणे देश के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए प्रमुख बाजार माने जाते हैं। ताजा आंकड़ों से स्पष्ट है कि सात महानगरों में हुई कुल घरों की बिक्री में इन दोनों शहरों की हिस्सेदारी 48 प्रतिशत है। इसके बावजूद, मांग में आई कमी से बाजार प्रभावित हुआ है।
मुंबई: इस साल की तीसरी तिमाही में 30,260 घर बिके, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह संख्या इससे काफी अधिक थी। इसमें 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
पुणे: यहां 16,620 घरों की बिक्री हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत कम है।
हैदराबाद में 11,305 और दिल्ली में 13,920 घर बिके, जिनमें 11 प्रतिशत की गिरावट रही। चेन्नई, बेंगलुरु और कोलकाता में भी इसी तरह की मंदी देखी गई।
घरों की कीमतों में लगातार वृद्धि
रिपोर्ट से यह भी सामने आया कि पिछले तीन वर्षों से घरों की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है।
पिछले वर्ष की तीसरी तिमाही में घरों की औसत कीमत 8,390 रुपए प्रति वर्ग फुट थी।
इस वर्ष की तीसरी तिमाही में यह बढ़कर 9,105 रुपए प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई है।
अर्थात्, साल-दर-साल इसमें 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दिल्ली में तो कीमतों में सबसे अधिक 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है, जिससे वहां भी मांग में कमी आई है।
बिक्री में गिरावट के मुख्य कारण
एनारॉक की रिपोर्ट में मांग घटने के कई प्रमुख कारणों का उल्लेख किया गया है।
लगातार बढ़ती कीमतें: तीन वर्षों से लगातार बढ़ते दाम उपभोक्ताओं को खरीदारी से दूर कर रहे हैं।
उच्च कीमतों का बोझ: आम उपभोक्ता के लिए बड़ी राशि निवेश करना कठिन हो गया है, खासकर मध्यम वर्ग पर इसका असर स्पष्ट है।
बड़े और आलीशान घरों की अधिक आपूर्ति: डेवलपर्स ने छोटे और किफायती घरों की तुलना में बड़े आकार के घरों पर ज्यादा ध्यान दिया है, जिससे सामान्य खरीदारों की पहुंच कम हो गई है।
आईटी क्षेत्र में छंटनी का असर: आईटी कंपनियों में हाल के महीनों में छंटनी की खबरों ने संभावित खरीदारों की नौकरी की स्थिरता पर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। इसका सीधा असर घर खरीदने की योजना पर पड़ा है।
उपभोक्ताओं पर असर
बाजार में घरों की मांग में गिरावट का असर सबसे ज्यादा उन परिवारों और युवाओं पर पड़ा है, जो पहली बार घर खरीदने की योजना बना रहे थे।
मध्यम वर्ग के परिवार अब बढ़ती कीमतों को देखते हुए अपने निर्णय टाल रहे हैं।
नौकरीपेशा युवाओं के बीच भी असुरक्षा की भावना बढ़ी है, खासकर आईटी और स्टार्टअप सेक्टर में छंटनी की खबरों के कारण।
निवेशकों की रुचि बड़े घरों या प्रीमियम प्रॉपर्टीज़ तक सीमित होती जा रही है, जिससे संतुलन बिगड़ रहा है।
डेवलपर्स और सरकार के सामने चुनौतियां
रियल एस्टेट क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार पाते हैं। वर्तमान स्थिति में डेवलपर्स और नीति-निर्माताओं दोनों के सामने चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
डेवलपर्स को किफायती घरों की आपूर्ति बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।
सरकार को होम लोन पर ब्याज दरों और आवास योजनाओं में राहत देकर उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में कदम उठाने पड़ सकते हैं।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतों पर नियंत्रण और मांग को बढ़ावा देने की कोशिशें नहीं की गईं, तो आने वाले महीनों में यह गिरावट और गहरी हो सकती है।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले त्योहारी सीजन में कुछ हद तक मांग में सुधार देखने को मिल सकता है। परंतु, यह तभी संभव होगा जब कीमतों में स्थिरता आए और उपभोक्ताओं को वित्तीय सहायता मिले।
त्योहारी ऑफर और छूट योजनाएं उपभोक्ताओं को आकर्षित कर सकती हैं।
ब्याज दरों में नरमी भी घर खरीदने वालों को राहत दे सकती है।
अगर डेवलपर्स किफायती और मध्यम श्रेणी के घरों पर ध्यान देंगे, तो बाजार को फिर से गति मिल सकती है।
