मुंबई: “छठ है, घर तो जाना ही है…”—यह इन दिनों मुंबई के हर रेलवे स्टेशन पर सुनाई दे रहा है। छठ महापर्व नजदीक आते ही मुंबई से उत्तर प्रदेश और बिहार लौटने वालों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। शहर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों—छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी), लोकमान्य तिलक टर्मिनस (एलटीटी), दादर और बांद्रा टर्मिनस—पर हजारों की संख्या में यात्री अपने गृह प्रदेशों के लिए रवाना होने की प्रतीक्षा में जुटे हुए हैं। रेलवे ने इस बार यात्रियों की सुविधा के लिए सैकड़ों स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थिति यह है कि एक ट्रेन पकड़ने के लिए लोगों को घंटों पहले लाइन लगानी पड़ रही है। गुरुवार को सीएसएमटी स्टेशन का दृश्य किसी मेला स्थल से कम नहीं था। प्लेटफॉर्म के बाहर लगी लंबी कतारों में बैठे लोग अपने घरों की ओर रवाना होने के इंतजार में थे। कई यात्रियों ने बताया कि रात 11 या 12 बजे की ट्रेन पकड़ने के लिए वे सुबह 10 बजे से ही स्टेशन पहुंच गए थे, ताकि जनरल डिब्बे में सीट मिलने की संभावना बनी रहे।
स्टेशन परिसर में होल्डिंग एरिया यात्रियों से पूरी तरह भर चुका था। लोग अपने साथ बड़े-बड़े बैग, टोकरे और झोले लिए हुए थे जिनमें घर के लिए उपहार, कपड़े और पूजा का सामान रखा था। बच्चों और महिलाओं की बड़ी संख्या स्टेशन पर मौजूद थी। दिलचस्प बात यह रही कि लाइन में बैठे अधिकांश यात्रियों के पास वैध टिकट थे, बस वे ट्रेन के समय का इंतजार कर रहे थे। कई लोग वहीं बैठकर खाना खा रहे थे, पानी पी रहे थे और थकान होने पर कुछ देर झपकी भी ले रहे थे। माहौल में एक अजीब सी शांति थी—भीड़ थी, मगर कोई अव्यवस्था नहीं। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), रेलवे पुलिस और टीसी लगातार निगरानी में जुटे हुए थे। प्लेटफॉर्म और गेटों पर पुलिसकर्मियों की अतिरिक्त तैनाती की गई थी ताकि किसी प्रकार की अफरा-तफरी की स्थिति न बने।
सीएसएमटी के अलावा लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर भी हालात कुछ ऐसे ही थे। यहां पर अधिकारियों ने यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए खास इंतजाम किए थे। गेट पर टीसी रिजर्वेशन टिकट की जांच कर रहे थे और जिन यात्रियों के पास अनारक्षित टिकट थे, उन्हें अलग लाइन में बैठाया गया था। स्टेशन प्रशासन ने व्यवस्था की थी कि जैसे ही उनकी ट्रेन आती है, उन्हें नियंत्रित तरीके से प्लेटफॉर्म पर भेजा जाए। एलटीटी के एक अधिकारी ने बताया कि वे हर ट्रेन के प्रस्थान से पहले लाइन में बैठे सभी यात्रियों को अंदर भेजने की कोशिश करते हैं ताकि किसी को पीछे न रहना पड़े। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि प्रतिदिन कितने यात्रियों को अन्त्योदय या अन्य अनारक्षित ट्रेनों से भेजा जा रहा है, तो उन्होंने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की। रेलवे के अनुसार, एक अन्त्योदय ट्रेन में करीब 2400 यात्रियों के सफर की क्षमता होती है, लेकिन छठ के समय यह संख्या कई बार इस सीमा को छू जाती है।
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, दिवाली और छठ पूजा के अवसर पर इस वर्ष अब तक रिकॉर्ड संख्या में यात्री मुंबई से उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए रवाना हो चुके हैं। मध्य और पश्चिम रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, अब तक लगभग 10 लाख 41 हजार लोग मुंबई से अपने गृह राज्यों की ओर जा चुके हैं। यात्रियों की इस विशाल संख्या को संभालने के लिए रेलवे ने अब तक 1414 विशेष ट्रेनें चलाई हैं। बुधवार को अकेले मध्य रेलवे के मार्ग पर 49 हजार यात्री रवाना हुए, जबकि गुरुवार को यह संख्या 50 हजार तक पहुंच गई। इन ट्रेनों में सीटें पूरी तरह भर चुकी हैं, और जनरल डिब्बों में जगह पाने के लिए लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
कई यात्रियों ने बताया कि उन्होंने आरक्षण टिकट के लिए पिछले तीन दिन तक लगातार कोशिश की, लेकिन किसी ट्रेन में सीट नहीं मिली। टिकट न मिलने के बावजूद वे अपने घर जाने के लिए अडिग हैं। एक यात्री जितेंद्र सिंह ने कहा, “हम सुबह से लाइन में हैं ताकि जनरल डिब्बे में जगह मिल जाए। छठ पर घर न जाएं, तो क्या फायदा? मां घाट पर पूजा देंगी, तो बेटा कैसे दूर रह सकता है।” इस तरह की भावनाएं हर यात्री के चेहरे पर साफ झलक रही थीं। महिलाएं बच्चों को संभालते हुए और पुरुष अपने सामान की रखवाली करते हुए समय बीता रहे थे।
रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन परिसर में अस्थायी विश्राम क्षेत्र, पीने के पानी की व्यवस्था और चिकित्सा केंद्र भी बनाए हैं। भोजन और स्नैक्स की दुकानों पर भीड़ लगी हुई है। रेलवे अधिकारी लगातार स्टेशन का दौरा कर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। आरपीएफ और सरकारी रेलवे पुलिस ने संयुक्त रूप से यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने और उतरने के दौरान सहायता देने के लिए विशेष टीम गठित की है। साथ ही, लाउडस्पीकर से यात्रियों को लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि वे धैर्य बनाए रखें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।
भीड़ बढ़ने के बावजूद स्टेशन पर व्यवस्था बनी हुई है। कई सामाजिक संस्थाएं और स्वयंसेवक यात्रियों को सहायता प्रदान कर रहे हैं। कुछ स्वयंसेवक स्टेशन पर यात्रियों को पानी और खाना बांटते नजर आए। सीएसएमटी और एलटीटी पर प्रशासनिक व्यवस्था की मजबूती से यह स्पष्ट है कि रेलवे ने इस बार भीड़ प्रबंधन को प्राथमिकता दी है। स्टेशन पर कोई अव्यवस्था या धक्का-मुक्की की बड़ी घटना सामने नहीं आई, जिससे संकेत मिलता है कि सभी अधिकारी लगातार सतर्क हैं।
छठ महापर्व उत्तर भारत के सबसे प्रमुख लोक पर्वों में से एक है, जो सूर्य उपासना और मातृत्व के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में लाखों श्रद्धालु सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। प्रवासी आबादी के लिए यह पर्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का भी प्रतीक है। इसलिए हर साल छठ से पहले मुंबई, पुणे, सूरत और दिल्ली जैसे महानगरों से उत्तर प्रदेश और बिहार लौटने वालों की संख्या लाखों में होती है। इस वर्ष यह संख्या पिछले वर्षों से अधिक बताई जा रही है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दो दिनों तक यह भीड़ और बढ़ने की संभावना है। अगले सप्ताह तक अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना तैयार की जा रही है, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके। वहीं, रेलवे प्रशासन यात्रियों से अपील कर रहा है कि वे यात्रा के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करें, ओवरलोड को रोकने में सहयोग दें और केवल वैध टिकट के साथ ही यात्रा करें।
मुंबई के रेलवे स्टेशनों पर इन दिनों दिखाई दे रहा यह दृश्य न सिर्फ भीड़ का, बल्कि भावनाओं का भी प्रतीक है। लोग अपने घर, अपनी मिट्टी और अपनी परंपराओं से जुड़ने के लिए हर कठिनाई का सामना करने को तैयार हैं। किसी के हाथ में छठ की सूप और नारियल है, तो किसी के बैग में प्रसाद के ठेकुआ और गुड़। सबकी एक ही मंजिल है—अपने गांव, अपने घर, जहां घाट पर उगते सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी चल रही है। यह भीड़ सिर्फ यात्रा की नहीं, बल्कि घर लौटने की चाह का प्रतीक है, जो हर साल छठ के समय मुंबई के स्टेशनों को यादगार बना देती है।
