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चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का मोर्चा, शरद पवार, उद्धव और राज ठाकरे साथ आए

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चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का मोर्चा, शरद पवार, उद्धव और राज ठाकरे साथ आए
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को एक दुर्लभ एकजुटता देखने को मिली जब राज्य के दिग्गज नेता शरद पवार, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ सड़क पर उतरे। तीनों नेताओं ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ मुंबई में निकाले गए ‘सत्याचा मोर्चा’ (सत्य के लिए मार्च) में भाग लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया।

इस विरोध मार्च का आयोजन शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) ने संयुक्त रूप से किया था, जिसमें महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। यह मार्च दक्षिण मुंबई के फैशन स्ट्रीट से शुरू होकर बीएमसी मुख्यालय तक पहुंचा, जहां हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की।

विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में की गई गड़बड़ियों से भाजपा को सीधा राजनीतिक लाभ मिल रहा है। प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने चुनाव आयोग पर इन शिकायतों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया और कहा कि जब तक इन कमियों को सुधारा नहीं जाता, तब तक स्थानीय निकाय चुनाव नहीं कराए जाने चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि “यह लड़ाई सिर्फ राजनीति की नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की है।” वहीं, एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग को तत्काल जांच कर अनियमितताओं को दूर करना चाहिए।

कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट, नसीम खान, सतेज पाटिल, भाई जगताप और सांसद सुप्रिया सुले भी इस विरोध मार्च में शामिल हुए। मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की।

वहीं, राज ठाकरे की भागीदारी ने इस विरोध को और खास बना दिया। वह अपने समर्थकों और पार्टी सहयोगी बाला नंदगांवकर के साथ दादर स्टेशन से लोकल ट्रेन पकड़कर चर्चगेट पहुंचे। कुछ दिन पहले ही उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर मोर्चे में शामिल होने की अपील की थी।

इससे पहले, शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में लिखा था कि “संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के बाद पहली बार सभी दल संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होकर उतरे हैं।” संपादकीय में यह भी आरोप लगाया गया कि ईवीएम और मतदाता सूची दोनों में हेराफेरी हो रही है, जिसके चलते भाजपा 2014 से लगातार चुनाव जीतती आ रही है।

संपादकीय के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद महाराष्ट्र में मतदाता सूची में 60 लाख से अधिक नए नाम जोड़े गए हैं, जिनकी सत्यता पर सवाल खड़े किए गए हैं।

‘सत्याचा मोर्चा’ ने विपक्षी एकजुटता की नई मिसाल पेश की है। जहां एक ओर सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया है, वहीं विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन अब लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक लंबी लड़ाई का रूप लेगा।

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