जापान इस समय एक नए और खतरनाक ड्रग संकट से जूझ रहा है। देश के कई हिस्सों में युवा ऐसे वेप लिक्विड का उपयोग कर रहे हैं, जिनमें एटोमिडेट नामक शक्तिशाली सिडेटिव मिलाया जा रहा है। इन्हें स्थानीय भाषा और सोशल मीडिया पर “जॉम्बी सिगरेट” कहा जा रहा है, क्योंकि इसे पीने के तुरंत बाद लोग कुछ देर के लिए चलती-फिरती ‘लाश’ जैसे व्यवहार करने लगते हैं—शरीर पर नियंत्रण खत्म हो जाता है, संतुलन बिगड़ जाता है और अक्सर उपयोगकर्ता सड़क पर गिर पड़ते हैं। इस बढ़ते खतरे ने जापान की पुलिस, स्वास्थ्य एजेंसियों और सरकार को गंभीर चिंता में डाल दिया है।
ओकिनावा प्रदेश इस समय संकट का सबसे बड़ा केंद्र माना जा रहा है। यहाँ किशोर और 20–25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में इस ड्रग का प्रयोग तेजी से बढ़ा है। पुलिस की लगातार छापेमार कार्रवाई के बावजूद एटोमिडेट-बेस्ड वेप के कार्ट्रिज बड़ी तेजी से फैल रहे हैं। क्योदो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर के अंत तक कम से कम 10 लोगों को एटोमिडेट रखने या बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका था।
एटोमिडेट मूल रूप से अस्पतालों में सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया के लिए उपयोग किया जाने वाला एक दवा पदार्थ है। यह मस्तिष्क के सेरिबेलम पर असर डालता है, जिससे शरीर का समन्वय बिगड़ जाता है। डॉक्टरों के शब्दों में, यह पदार्थ नशा नहीं बल्कि “बेहोशी और नियंत्रण खोने” वाली स्थिति पैदा करता है। यही कारण है कि इसे वेप में मिलाकर सेवन करने वाले तुरंत असहाय और असंतुलित दिखने लगते हैं।
हालांकि जापान ने मई 2025 में एटोमिडेट को आधिकारिक रूप से ‘प्रतिबंधित ड्रग’ घोषित किया था, लेकिन इसके बावजूद इसकी तस्करी और सप्लाई पर रोक नहीं लग पाई है। अक्टूबर में एक बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने यूटो अगरिये नामक युवक को गिरफ्तार किया, जिसके घर से 64 ग्राम एटोमिडेट मिला। माना जाता है कि उसका नेटवर्क ओकिनावा में इसका प्रमुख सप्लायर था।
ड्रग तस्करी की सप्लाई चेन भी चिंताजनक रूप से जटिल है। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें ताइवानी माफिया, चीन से जुड़े गिरोह, जापानी याकूजा के संपर्क और वियतनाम के मैन्युफैक्चरिंग हब की कड़ियां शामिल हैं। तस्कर माल को खुले समुद्र में जहाजों के माध्यम से बदलते हैं, ताकि किसी भी समय पुलिस दिखाई पड़े तो वे सामान को पानी में फेंककर बच निकलें। इस खेल को पकड़ा जाना मुश्किल है, क्योंकि समुद्री मार्गों की निगरानी सीमित है।
ड्रग स्थानीय स्तर पर कैसे बेचा जा रहा है?
जांच एजेंसियों के अनुसार, जॉम्बी सिगरेट वाले कार्ट्रिज एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और गुप्त चैट समूहों के माध्यम से बेचे जा रहे हैं। विक्रेता अक्सर नकली प्रोफाइल, कोड भाषा और विशेष इमोजी का उपयोग करते हैं ताकि पुलिस की निगरानी में फंसने से बच सकें। ओकिनावा में इसकी कीमत लगभग 20,000 येन बताई जाती है, लेकिन यह प्रति कार्ट्रिज है या प्रति पैक—इस पर स्पष्ट जानकारी नहीं है।
एक अन्य मामले में टोक्यो क्षेत्र में तीन चीनी नागरिक गिरफ्तार किए गए थे। जांच में सामने आया कि वे भारत से एटोमिडेट की खेप मंगाकर, सिंगापुर के रास्ते जापान भेजते थे और फिर उसे वेप लिक्विड में बदलकर बेचते थे।
संयुक्त राष्ट्र ड्रग एंड क्राइम ऑफिस ने पूर्वी और दक्षिण-पूर्व एशिया में एटोमिडेट और उससे मिलते-जुलते पदार्थों के उपयोग में बढ़ोतरी की पुष्टि की है। विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रग मार्केट नीतियों से कहीं अधिक तेज गति से बदल रहा है और स्थिति 1960 के दशक के जापान के ड्रग संकट से भी बदतर हो सकती है।
एटोमिडेट वेप के असर
वेपिंग के माध्यम से शरीर में पहुंचने वाला यह पदार्थ कई खतरनाक प्रभाव छोड़ सकता है—
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अचानक नशे जैसा उत्साह
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हल्यूसीनेशन
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दौरे पड़ना
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मानसिक भ्रम
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शरीर पर नियंत्रण खो देना
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गंभीर मामलों में अंगों के फेल होने तक का खतरा
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो फेंटानिल जैसी अत्यंत खतरनाक दवाओं की लत दोबारा जापानी समाज में गहरी जड़ें जमा सकती है। अमेरिकी CDC के अनुसार फेंटानिल हेरोइन से 50 गुना अधिक शक्तिशाली है, और पिछले वर्षों में इसने दुनिया भर में लाखों जानें ली हैं। एटोमिडेट और फेंटानिल जैसे पदार्थों के मेल से तैयार ड्रग्स जापान के लिए नया और घातक खतरा बनते जा रहे हैं।
सरकारी एजेंसियों की चुनौती
स्वास्थ्य मंत्रालय और पुलिस ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर निगरानी बढ़ाई है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि कानून अभी भी ड्रग सप्लाई चेन की रफ्तार से पीछे है। इस पदार्थ को प्रतिबंधित घोषित किए जाने में भी देर हुई, जिसका फायदा तस्करों ने उठाया। अब जब यह अवैध है, तब भी इसकी ऑनलाइन बिक्री और छोटे पैकेटों में तस्करी रोकना कठिन बना हुआ है।
फिलहाल जापान में इस ड्रग का प्रसार ओकिनावा से आगे अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ने लगा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था, दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
