Home राजनीतिराज्यमहाराष्ट्रगोवंडी में नवजात शिशु बेचने का घिनौना कांड; डॉक्टर समेत पाँच गिरफ्तार

गोवंडी में नवजात शिशु बेचने का घिनौना कांड; डॉक्टर समेत पाँच गिरफ्तार

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शिवाजीनगर पुलिस की कार्रवाई से बच्चा तस्करी रैकेट का भंडाफोड़

मुंबई। गोवंडी इलाके में एक नवजात शिशु को बेचने की कोशिश करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए शिवाजीनगर पुलिस ने एक डॉक्टर समेत पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है। मामला रॉयल हॉस्पिटल नामक एक प्रसूति गृह से जुड़ा है, जहाँ चोरी-छिपे बच्चे की डील होने की जानकारी पुलिस को मिली थी। शुरुआती जांच में यह सामने आया कि बच्चा एक अविवाहित युवती का था, जिसे प्रसव के तुरंत बाद अस्पताल से घर भेज दिया गया था।

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को शनिवार शाम सूचना मिली कि प्लॉट नंबर 5 स्थित इस निजी प्रसूति गृह में हाल ही में जन्मे एक नवजात को पाँच लाख रुपये में बेचने की तैयारी चल रही है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने तुरंत छापा मारा। अस्पताल में प्रवेश करते ही उन्हें एक नवजात शिशु मिला, जिसकी मौजूदगी संदिग्ध परिस्थितियों में थी। मौके पर मौजूद महिला कर्मचारियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने शुरू में टालमटोल किया और स्पष्ट जानकारी देने से बचती रहीं।

लेकिन पुलिस के सख्त रुख के बाद सच सामने आने लगा। कर्मचारियों ने बताया कि यह बच्चा नवी मुंबई में रहने वाली एक अविवाहित लड़की का है। युवती ने कुछ दिन पहले इसी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। अस्पताल स्टाफ ने उसके परिवार को यह कहकर भेज दिया कि बच्चा ‘अन्य देखभाल में’ है, जबकि असल में उसे अवैध रूप से बेचने की तैयारी चल रही थी।

आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टर कयामुद्दीन खान पूरे रैकेट का संचालन कर रहा था। पूछताछ के दौरान उसने माना कि वह नवजात को पाँच लाख रुपये में सौंपने वाला था। पुलिस ने डॉक्टर के अलावा दो महिला बिचौलियों और अस्पताल में काम कर रही दो महिलाओं को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि ये महिलाएँ अविवाहित या कमजोर परिस्थितियों में प्रसव करने वाली युवतियों की पहचान कर उन्हें बच्चे को ‘किसी सुरक्षित जगह भेजने’ के नाम पर बहकाती थीं।

शिवाजीनगर पुलिस ने बताया कि अस्पताल का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह एक अकेला मामला है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा रैकेट सक्रिय है। पुलिस अब उस युवती से भी संपर्क कर रही है जिसका बच्चा बेचे जाने वाला था, ताकि उसकी स्थिति और बयान दर्ज किए जा सकें।

जाँच अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती तथ्य बताते हैं कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और ऐसे मामलों में निजी अस्पतालों का इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस अब कॉल डिटेल्स, सीसीटीवी फुटेज और अस्पताल के दस्तावेजों की जाँच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे और गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं।

इस पूरे कांड ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना निजी अस्पतालों की निगरानी और सरकारी एजेंसियों की तत्परता पर कई सवाल खड़े करती है। उधर, पुलिस ने आश्वासन दिया है कि नवजात को सुरक्षित रखा गया है और उसे बाल कल्याण समिति की निगरानी में भेजा जाएगा।

फिलहाल, पाँचों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी और जेजे एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का मानना है कि समय रहते मिली सूचना ने एक नाजुक जान को गलत हाथों में जाने से बचा लिया।

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