एमपी में गजबे बा : मृत शिक्षकों से पूछा – स्कूल क्यों नहीं आते?

मऊगंज में शिक्षा विभाग की शर्मनाक लापरवाही, तीन मृत शिक्षकों को थमाई नोटिस

मऊगंज (मध्य प्रदेश)। सरकारी स्कूलों में ई-अटेंडेंस की सख्ती के नाम पर मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के शिक्षा विभाग ने ऐसा कारनामा कर दिखाया कि हर कोई हैरान है। विभाग ने तीन ऐसे शिक्षकों को नोटिस जारी कर दी जिनकी मौत कई महीने और साल पहले हो चुकी है। नोटिस में लिखा है – “तीन दिन में स्पष्ट करें कि आप शिक्षक एप पर रोज हाजिरी क्यों नहीं लगा रहे? जवाब नहीं देने पर वेतन रोका जाएगा।”

यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब ये शिक्षक सालों से इस दुनिया में नहीं हैं, तो क्या अब तक इनके खाते में वेतन-भत्ते जा रहे थे? और अगर जा रहे थे तो वह पैसा कहाँ जा रहा था?

ये हैं वो तीन मृत शिक्षक जिन्हें भेजी गई नोटिस

रामगरीब दीपांकर – प्राथमिक शाला बैरिहा (नईगढ़ी)

मौत: 17 फरवरी 2025

नोटिस में लिखा गया – “आपकी ई-अटेंडेंस शून्य है, तीन दिन में जवाब दें।”

छोटेलाल साकेत – प्राथमिक शाला दुबगवां

मौत: 29 मई 2025

इन्हें भी यही नोटिस भेजी गई।

देवतादीन कोल – शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खर्रा (नईगढ़ी)

मौत: वर्ष 2023

सबसे पुराना मामला, फिर भी नाम लिस्ट में शामिल।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने प्रदेशभर में 1,500 से ज्यादा शिक्षकों को नोटिस भेजी थीं। लेकिन जब मृत शिक्षकों के नाम सामने आए तो स्थानीय लोग और शिक्षक संगठन भड़क उठे। शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने इसे “विभाग की घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत” बताया।

अधिकारी बोले – “तकनीकी गलती”

मामला तूल पकड़ते देख जिला शिक्षा अधिकारी ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, “यह तकनीकी खामी है। डेटाबेस अपडेट नहीं हुआ था। हम जल्द ही सभी मृत शिक्षकों के नाम हटा कर नई लिस्ट जारी करेंगे।” हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि मृत शिक्षकों के खातों में अब तक कितना वेतन गया और उसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

शिक्षक संगठनों ने की CBI जांच की मांग

मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है। संघ के जिला अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद तिवारी ने कहा, “केवल मऊगंज ही नहीं, पूरे प्रदेश में हजारों मृत शिक्षकों-स कर्मचारियों के नाम अभी भी सर्विस बुक में हैं। हर महीने करोड़ों रुपये का वेतन निकाला जा रहा है। यह बड़ा घोटाला है। सिर्फ नोटिस वापस लेकर अधिकारी पल्ला नहीं झाड़ सकते।”

इधर, स्थानीय विधायक ने भी मामले का संज्ञान लिया है और शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर पूरे जिले के डेटाबेस की ऑडिट कराने की मांग की है।

ई-अटेंडेंस व्यवस्था प्रदेश में पिछले साल से अनिवार्य की गई थी। शुरू में शिक्षकों ने इसका विरोध किया था, लेकिन अब यही व्यवस्था विभाग की फजीहत का कारण बन गई है।

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