पुणे। आधुनिक युद्ध की बदलती तस्वीर में टेक्नोलॉजी भले ही सबसे आगे नज़र आती हो, लेकिन निर्णायक जीत अब भी इंसानी कौशल पर निर्भर करती है। यह स्पष्ट संदेश दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने शुक्रवार को कांबेट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल (सीएएटीएस) की पासिंग-आउट परेड में दिया। परेड की समीक्षा के बाद संबोधन में उन्होंने कहा, “मशीनें युद्ध नहीं जीततीं, बल्कि उन्हें चलाने वाले एविएटर्स की स्किल, निर्णय क्षमता और साहस ही विजय सुनिश्चित करता है।”
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में युद्ध का चरित्र ऐसे रूप ले रहा है, जो “दशकों में कभी नहीं देखा गया।” आधुनिक युद्धक्षेत्र में प्रिसिजन स्ट्राइक, कंटेस्टेड एयरस्पेस, मल्टी-डोमेन इंटीग्रेशन और हाई-टेम्पो ऑपरेशंस नई वास्तविकता बन चुके हैं। ऐसे परिवेश में आर्मी एविएशन सेना का वह ‘थर्ड डायमेंशन’ है, जो निर्णायक बढ़त दिलाने में प्रमुख भूमिका निभा रहा है।
सेठ ने कहा कि मैनड और अनमैंड प्लेटफॉर्म्स का संयोजन आज कमांडरों को निगरानी, टोही, त्वरित लिफ्ट, आक्रमण और प्रिसिजन इंगेजमेंट जैसी क्षमताओं से लैस कर रहा है। यह आर्मी एविएशन को एक शक्तिशाली कॉम्बैट मल्टिप्लायर बनाता है। उन्होंने खुलासा किया कि भविष्य में कई नई तकनीकों का इंडक्शन होने वाला है, जो इन क्षमताओं को और मजबूत करेगा।
इसके बावजूद उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्धभूमि पर मशीनें कभी भी एविएटर की समझ, अनुशासन और अनुभव का विकल्प नहीं बन सकतीं। इसी कारण सीएएटीएस को रीमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट ऑपरेशंस और कॉम्बैट एयर मैन्यूवर के विशेष केंद्र के रूप में घोषित किया गया है, ताकि भविष्य के एविएटर्स को उच्चतम मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा सके।
नए पास-आउट एविएटर्स को संबोधित करते हुए सेठ ने कहा कि हर मिशन में पूर्ण सिचुएशनल अवेयरनेस, SOPs का पालन, मशीन के प्रति संवेदनशीलता और मिशन सुरक्षा के प्रति समर्पण अनिवार्य है। उन्होंने चेताया कि “कॉम्बैट फ्लाइंग में गलती की गुंजाइश बेहद कम होती है और दांव बहुत बड़े। कभी लाल रेखाएं पार न करें और न ही सुरक्षा को जोखिम में डालें।”
इस वर्ष की परेड खास थी, क्योंकि पहली बार तीन कोर्स—कांबेट एविएशन कोर्स (सीएसी), आर्मी हेलीकॉप्टर इंस्ट्रक्टर कोर्स (एएचआईसी) और संयुक्त इंटरनल पायलट एवं ऑब्ज़र्वर कोर्स—एक साथ पास आउट हुए।
पुरस्कार वितरण में कैप्टन अजीत सिंह को संयुक्त आईपी/ओबी कोर्स में ‘बेस्ट कैडेट’ घोषित किया गया। कैप्टन कुशल शर्मा को कॉम्बैट एविएटर्स कोर्स में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर प्रतिष्ठित ‘सिल्वर चीता’ ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। वहीं मेजर परमवीर सिंह शेखावत को एएचआईसी में ‘फर्स्ट इन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ का सम्मान मिला।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा कॉम्बैट एविएशन डेमोंस्ट्रेशन, जिसमें हेलीकॉप्टरों, आरपीए प्लेटफॉर्म्स, हेक्साकॉप्टर्स, पैदल सेना और बख्तरबंद वाहनों ने संयुक्त युद्धक क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन ने दर्शाया कि आधुनिक सेना में ‘एयर-लैंड बैटल इंटीग्रेशन’ किस तरह निर्णायक भूमिका निभाता है।
