बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन से उपजे सामूहिक शोक में पूरा फ़िल्म उद्योग डूबा हुआ है। इस दुखद घड़ी में फ़ैशन डिज़ाइनर से फ़िल्म निर्माता बने मनीष मल्होत्रा ने अपनी पहली प्रस्तुति ‘गुस्ताख़ इश्क़ – कुछ पहले जैसा’ की सेलिब्रिटी स्क्रीनिंग को 28 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दिया। ध्यान देने योग्य बात यह है कि फ़िल्म की रिलीज़ तिथि भी यही 28 नवंबर है।
आज के व्यावसायिक दौर में जहाँ रिलीज़ शेड्यूल को टालना लगभग असंभव माना जाता है, वहाँ मनीष मल्होत्रा का यह कदम असाधारण रूप से संवेदनशील और सम्मानजनक लग रहा है। सूत्रों के अनुसार यह निर्णय खुद मनीष ने लिया, जो धर्मेंद्र को अपना आदर्श मानते रहे हैं। इंडस्ट्री के कई वरिष्ठ कलाकारों ने इसे “दिवंगत महानायक के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि” करार दिया है।
‘गुस्ताख़ इश्क़’ मनीष मल्होत्रा और उनके भाई दिनेश मल्होत्रा के बैनर स्टेज5 प्रोडक्शंस की पहली फ़िल्म है। निर्देशक विभू पुरी की यह संगीतमय प्रेम कहानी हाल ही में गोवा में संपन्न 56वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव (IFFI) में विश्व प्रीमियर के दौरान दर्शकों का दिल जीत चुकी है। फ़िल्म को अंत तक खड़े होकर तालियाँ मिलीं और कई दर्शक भावुक हो गए थे।
कहानी पुरानी दिल्ली की तंग गलियों और पंजाब की ढलती हवेलियों के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जिसमें जुनून, अधूरी ख्वाहिशें और ख़ामोश प्रेम की परतें हैं। नसीरुद्दीन शाह, विजय वर्मा, फ़ातिमा सना शेख़ और शारिब हाशमी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। संगीत शांतनु मोइत्रा का है और गीत गुलज़ार साहब ने लिखे हैं।
फ़िल्म से जुड़े एक करीबी सूत्र ने बताया, “मनीष भाई ने साफ़ कहा कि जब पूरा उद्योग शोक मना रहा हो, तब सेलिब्रिटी स्क्रीनिंग का उत्सव मनाना ठीक नहीं। फ़िल्म तो 28 को रिलीज़ हो ही रही है, लेकिन पहले धर्मेंद्र साहब को सच्ची श्रद्धांजलि देना ज़रूरी है।”
इंडस्ट्री में इस फ़ैसले की व्यापक सराहना हो रही है। कई निर्माताओं ने निजी तौर पर मनीष को फ़ोन करके धन्यवाद कहा है। एक वरिष्ठ निर्माता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “आजकल तो बॉक्स-ऑफ़िस की जंग में इंसानियत कहीं खो सी गई है। मनीष ने याद दिलाया कि फ़िल्में सिर्फ़ बिज़नेस नहीं, भावनाओं का माध्यम भी हैं।”
‘गुस्ताख़ इश्क़ – कुछ पहले जैसा’ 28 नवंबर को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। धर्मेंद्र के चाहने वालों का मानना है कि यह फ़िल्म दिवंगत अभिनेता को एक ख़ामोश लेकिन सशक्त ट्रिब्यूट होगी, क्योंकि मनीष मल्होत्रा ने जिस संवेदनशीलता से यह कदम उठाया, वही संवेदनशीलता फ़िल्म की हर फ्रेम में दिखती है।
