डोंबिवली में कोयता गिरोह का खौफ, बढ़ती घटनाओं पर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल

डोंबिवली। डोंबिवली में इन दिनों कोयता गैंग और सड़कछाप गिरोहों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों में भय का माहौल पैदा हो गया है। देर रात सड़कों पर हथियारबंद युवकों द्वारा कोयता और तलवारें लहराने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। गुरुवार सुबह हुई ताजा वारदात इसका ताजा उदाहरण है, जिसकी तस्वीरें आसपास के सीसीटीवी कैमरों में साफ कैद हुई हैं। फुटेज में कई युवक राहगीरों को डराते–धमकाते और गाली–गलौज करते दिखाई दे रहे हैं।

इन घटनाओं ने डोंबिवली की कानून–व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने खाम्बलपाड़ा क्षेत्र से दो युवकों को हथियारों के साथ गिरफ्तार जरूर किया है, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कार्रवाई घटनाओं के बाद की औपचारिकता भर है। नागरिकों का आरोप है कि पुलिस गश्त कागजों में सक्रिय दिखती है, जबकि जमीन पर अपराधी बिना किसी डर के खुलेआम घूम रहे हैं। लोग यह भी कहते हैं कि हर वारदात के बाद पुलिस प्रेस नोट जारी कर कार्रवाई दिखाती है, लेकिन अपराधियों के हौसले कम होने की बजाय लगातार बढ़ रहे हैं।

डोंबिवली ही नहीं, इससे पहले उल्हासनगर के विट्ठलवाड़ी, अशेले और मनेरे पाड़ा क्षेत्रों में भी इसी तरह के गिरोह नशे की हालत में सड़कों पर उत्पात मचा चुके हैं। इन घटनाओं में वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया था और आम लोगों को देर रात घर लौटने में भय महसूस होने लगा है। अब यह सिलसिला कल्याण–डोंबिवली बेल्ट तक फैलता दिख रहा है, जिससे स्थानीय पुलिस प्रशासन पर दबाव और भी बढ़ गया है।

जनता का कहना है कि पुलिस को केवल गिरफ्तारी की संख्या बढ़ाने से ज्यादा, ऐसे गिरोहों पर जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई करनी होगी। निवासियों ने बताया कि रात्रि गश्त को मजबूती, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई से ही इलाके में अपराध कम हो पाएंगे। कई नागरिकों ने यह भी सुझाव दिया कि पुलिस को समुदाय के साथ समन्वय बढ़ाकर युवा अपराधियों को रोकथाम की दिशा में लाना चाहिए।

स्थानीय संगठनों ने मांग की है कि डोंबिवली में कानून–व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए और लगातार हो रही वारदातों पर लगाम लगाने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाए। उनका कहना है कि कानून का भय खत्म होने से अपराधियों का मनोबल बढ़ रहा है, जिसे जल्द से जल्द नियंत्रित करना आवश्यक है। नागरिकों को उम्मीद है कि पुलिस प्रशासन इस बढ़ते खतरे को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बहाल करने की ठोस पहल करेगा।

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