लातविया में बदलते जनसांख्यिकी का अनोखा असर
यूरोप का छोटा और खूबसूरत देश लातविया आज एक विचित्र सामाजिक समस्या से गुजर रहा है—पुरुषों की तेज़ी से घटती संख्या। ऊंची शिक्षा, उन्नत सोच और आधुनिक जीवनशैली के लिए प्रसिद्ध लातवियाई महिलाओं को अब जीवनसाथी ढूंढने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आंकड़े दिखाते हैं कि यहां 100 महिलाओं पर सिर्फ 84–85 पुरुष हैं। यानी पुरुषों का अकाल साफ दिखाई देता है।
इसके पीछे कई कारण माने जा रहे हैं—पुरुषों में कम उम्र में मृत्यु दर, शराब व धूम्रपान की अधिकता, अस्वस्थ जीवनशैली, विदेशों में काम और बेहतर जीवन की तलाश में पुरुषों का बड़े पैमाने पर पलायन आदि। परिणामस्वरूप, देश में योग्य, पढ़े-लिखे और कमाने वाले पुरुषों की संख्या लगातार कम होती जा रही है।
महिलाओं में बढ़ती अकेलेपन की समस्या
लातविया की जानी-मानी लेखिका और कॉलमिस्ट डेस रुक्साने ने इस विषय पर खुलकर अपनी राय रखी है। उनका कहना है—“सबसे खूबसूरत और होशियार लड़कियां भी यहां अकेली रह जाती हैं। वे ऐसा पार्टनर ढूंढती हैं जो पढ़ाई, करियर, सोच और जीवनशैली में उनकी बराबरी का हो, लेकिन ऐसा पुरुष मिलना आज लगभग नामुमकिन हो गया है।”
रुक्साने के मुताबिक, पुरुषों का पलायन और कम आयु में मौतें महिलाओं के लिए “उपयुक्त साथी की कमी” का बड़ा कारण बन चुकी हैं।
लातविया में पुरुषों की औसत उम्र महिलाओं से लगभग 10 साल कम है। 50 साल के बाद यह अंतर और भी बढ़ जाता है, क्योंकि शराब की लत, धूम्रपान और असंतुलित जीवनशैली से पुरुषों की मृत्यु दर काफी ज्यादा है। हैरानी की बात यह है कि आत्महत्या मामलों में भी 80% से अधिक पुरुष ही होते हैं। ऐसे में देश में अविवाहित, सफल और आत्मनिर्भर महिलाओं की संख्या तेज़ी से बढ़ चुकी है।
समस्या का अनोखा समाधान—‘एक घंटे का पति’
इस असंतुलन से जूझती महिलाओं ने इसका एक दिलचस्प समाधान निकाला है—किराए पर ‘एक घंटे का पति’।
रीगा और अन्य बड़े शहरों में कई कंपनियां अब ऐसी सर्विस दे रही हैं। महिलाएं फोन या ऑनलाइन बुकिंग के जरिए कुछ यूरो में एक ‘सुनहरे हाथों वाले आदमी’ को घर बुला सकती हैं, जो उनके घरेलू काम मिनटों में निपटा देता है।
ये किराए के ‘पति’ निम्नलिखित काम करते हैं—
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प्लंबिंग दुरुस्त करना
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बल्ब या इलेक्ट्रिकल फिटिंग ठीक करना
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टीवी या घरेलू उपकरण इंस्टॉल करना
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फर्नीचर असेंबल करना
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छोटा-मोटा मरम्मत कार्य
ज़्यादातर सर्विस 60 मिनट के अंदर घर पहुंच जाती है। यह सुविधा खासकर उन महिलाओं में लोकप्रिय है, जो अकेली रहती हैं और तकनीकी या भारी घरेलू कार्य खुद नहीं कर पातीं।
सोशल मीडिया पर ट्रेंड, महिलाओं की खुली प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर यह ट्रेंड खूब चर्चा में है। कई महिलाएं मज़ाक में कहती हैं— “शादी भले ना हो, पर कम से कम नल ठीक कराने वाला तो मिल गया!”
कुछ का मानना है कि यह सेवा महिलाओं को सशक्त भी बना रही है, क्योंकि इससे वे किसी पुरुष पर हमेशा निर्भर नहीं रहतीं। वे चाहें तो घंटे भर का ‘तकनीकी पति’ बुला सकती हैं और बाकी जिंदगी खुद जी सकती हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह समाधान सिर्फ घरेलू जरूरतों तक सीमित है। असली समस्या—योग्य जीवनसाथियों की कमी—अभी भी जस की तस बनी हुई है। कई महिलाएं अच्छी नौकरी, सामाजिक पहचान और आर्थिक स्वतंत्रता के बावजूद अकेलेपन से जूझ रही हैं।
पुरुषों की कमी, देश के लिए बढ़ती चिंता
लातविया की जनसंख्या का औसत आयु स्तर अब 44 वर्ष के आसपास पहुंच गया है। मृत्यु दर प्रति 1,000 व्यक्ति पर 14.9 दर्ज की जा रही है, जो यूरोप में सबसे अधिक दरों में से एक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति बरकरार रही, तो लातविया की युवा जनसंख्या और विवाह दर दोनों तेज़ी से गिरते जाएंगे।
पुरुषों में आत्महत्या की उच्च दर और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण सरकार भी चिंतित है। विभिन्न स्वास्थ्य अभियान चलाने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन उनका असर अभी सीमित दिखाई दे रहा है।
भविष्य की राह
आज लातविया की महिलाएं अपने करियर, सामाजिक गतिविधियों और दोस्तों के साथ व्यस्त हैं। घरेलू जरूरतों के लिए ‘एक घंटे के पति’ उनकी सहायता कर रहे हैं, लेकिन जीवनसाथी की वास्तविक तलाश अभी भी अधूरी है।
जनसंख्या विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार रोजगार, स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर दे, तो पुरुषों की संख्या स्थिर हो सकती है और यह अजीबोगरीब सामाजिक असंतुलन कम हो सकता है। फिलहाल, लातविया का यह अनोखा ट्रेंड दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है—क्योंकि खूबसूरत देश की खूबसूरत महिलाओं को आज भी एक योग्य जीवनसाथी की तलाश है, और पुरुषों की कमी ने इसे और भी मुश्किल बना दिया है।