12 मार्च को लखनऊ में ‘गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ का शंखनाद
वाराणसी। गौमाता को राज्य माता घोषित करने और प्रदेश से बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आंदोलन का औपचारिक एलान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार को दी गई 40 दिन की चेतावनी अवधि 11 मार्च को पूरी हो रही है। यदि इस अवधि में मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया तो 12 मार्च को लखनऊ में ‘गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ का शंखनाद किया जाएगा।
काशी के केदारघाट स्थित श्री विद्या मठ में आयोजित प्रेस वार्ता में शंकराचार्य ने कहा कि यह आंदोलन केवल धार्मिक भावना से प्रेरित नहीं है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गौमाता भारतीय जीवन, कृषि और संस्कृति की आधारशिला रही हैं। उनका संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि 6 मार्च को संकल्प दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन शंकराचार्य घाट पर ‘गो ब्राह्मण प्रतिपालक’ वीर शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर गंगा माता की पूजा कर धर्म युद्ध के शंखनाद का संकल्प लिया जाएगा। इसके बाद 7 मार्च को सुबह 8.30 बजे श्री विद्या मठ से यात्रा प्रारंभ होगी। संकटमोचन मंदिर में हनुमानाष्टक, हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ कर विघ्नों के नाश की प्रार्थना की जाएगी।
यात्रा के क्रम में 7 मार्च को जौनपुर, सुल्तानपुर और रायबरेली में सभाएं तथा रात्रि विश्राम होगा। 8 मार्च को मोहनलालगंज, लालगंज, अचलगंज और उन्नाव में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 9 मार्च को उन्नाव, बांगरमऊ, बघौली और नैमिषारण्य में जनसभाएं होंगी। 10 मार्च को नैमिषारण्य से सिधौली और इटौंजा होते हुए लखनऊ सीमा में प्रवेश किया जाएगा, जहां रात्रि विश्राम होगा।
11 मार्च को दोपहर 2.15 से 5 बजे तक कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, पासी किला चौराहा, आशियाना में विद्वानों की सभा आयोजित की जाएगी। इसमें देशभर से धर्माचार्य, साधु संत और अनुयायी भाग लेंगे।
शंकराचार्य ने कहा कि 30 दिन की अवधि पूर्ण हो चुकी है और शेष 10 दिनों में यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो 12 मार्च को लखनऊ में ‘गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ का औपचारिक शंखनाद किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके बाद की स्थिति के लिए प्रदेश सरकार स्वयं जिम्मेदार होगी।
उन्होंने दोहराया कि इस अभियान का उद्देश्य समाज में गौमाता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और संरक्षण के लिए व्यापक जनसमर्थन जुटाना है। आंदोलन की घोषणा के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस विषय पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सबकी निगाहें 11 मार्च तक प्रदेश सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।