Home ताजा खबर‘कार्यकर्ताओं को बिना मांगे सम्मान देना ही शिवसेना की परंपरा’, महिला दिवस पर ‘शिवदुर्गा सम्मान’ समारोह में बोले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

‘कार्यकर्ताओं को बिना मांगे सम्मान देना ही शिवसेना की परंपरा’, महिला दिवस पर ‘शिवदुर्गा सम्मान’ समारोह में बोले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

by trilokvivechana
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मुंबई। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शिवसेना महिला सेना की ओर से शीव स्थित षण्मुखानंद सभागार में ‘शिवदुर्गा सम्मान’ समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिवसेना की पहचान ही जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को बिना मांगे जिम्मेदारी और सम्मान देने की परंपरा से है।

शिंदे ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने समाज के हर वर्ग को साथ लेकर शिवसेना को मजबूत बनाया और पार्टी आज भी उनके विचारों के मार्ग पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि समर्पित कार्यकर्ता ही संगठन की असली ताकत हैं और पार्टी ऐसे कार्यकर्ताओं को समय-समय पर आगे बढ़ने का अवसर देती है।

समारोह में राज्यसभा उम्मीदवार डॉ. ज्योति वाघमारे का विशेष सत्कार किया गया। इस दौरान शिंदे ने बताया कि वाघमारे को भी शुरुआत में यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया जाएगा। उन्हें कुछ जरूरी दस्तावेज तैयार करने के लिए कहा गया था और बाद में पता चला कि वह दरअसल राज्यसभा उम्मीदवारी का आवेदन पत्र था।

इस अवसर पर सांसद श्रीकांत शिंदे, विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरहे, उद्योग मंत्री उदय सामंत, स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर, वरिष्ठ नेता गजानन कीर्तिकार, राज्यसभा सदस्य मिलिंद देवरा और विधायक मनीषा कायंदे सहित बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता मौजूद रहीं।

उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही है। ‘माता सुरक्षित अभियान’ के तहत करीब तीन करोड़ महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें लगभग दस हजार महिलाओं में कैंसर का समय रहते पता चला और उनका उपचार संभव हो सका। उन्होंने बताया कि ‘आरोग्य आपके द्वार’, ‘माता सुरक्षित–परिवार सुरक्षित’ और एचपीवी टीकाकरण जैसे कार्यक्रम भी महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखकर चलाए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली 10 महिलाओं को ‘शिवदुर्गा सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इनमें सोनाली कोचरेकर, स्मिता बामने, शुभांगी पाटिल, डॉ. कांचन बागल, सुजाता कोम्मुवाडे, सुवर्णा साबले, कोमल तायडे, दीप्ती इडेकर, स्नेहा गुज्जलवार और एडवोकेट वंदना शेरखाने शामिल हैं। इसके साथ ही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 50 फूड ट्रक भी लाभार्थियों को वितरित किए गए।

लाडकी बहन योजना का जिक्र
शिंदे ने कहा कि राज्य में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ‘लाडकी बहन’ योजना सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा और स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों में महिलाओं ने अपनी मजबूत भागीदारी से साबित कर दिया है कि वे राज्य की बड़ी ताकत हैं। शिंदे ने कहा कि ‘लाडकी बहनों का लाडका भाऊ’ कहलाना उनके लिए किसी भी बड़े पद से बढ़कर सम्मान की बात है।

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