नई दिल्ली : रसोई में खाना बनाने के लिए गैस चूल्हा बेहतर है या इंडक्शन कुकटॉप—यह सवाल लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग मानते हैं कि गैस पर खाना बनाना ज्यादा सस्ता पड़ता है, जबकि कई लोगों का दावा है कि इंडक्शन कुकटॉप बिजली की मदद से कम खर्च में काम कर देता है। इसी बहस के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति ने छोटे से प्रयोग के जरिए दोनों तरीकों की लागत की तुलना करने की कोशिश की है। इस प्रयोग का परिणाम जानकर कई लोग हैरान रह गए।
वीडियो में दिखाया गया है कि व्यक्ति ने सबसे पहले इंडक्शन चूल्हे पर पानी गर्म करके उसकी लागत का आकलन किया। उसने एक बर्तन में दो लीटर पानी लिया और उसे इंडक्शन कुकटॉप पर करीब 90 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया। इस दौरान उसने बिजली की खपत मापने के लिए मीटर भी लगाया था। प्रयोग पूरा होने पर मीटर में 0.201 किलोवाट घंटे यानी लगभग 0.201 यूनिट बिजली की खपत दर्ज हुई। स्थानीय बिजली दर के हिसाब से इस बिजली की कीमत करीब 1 रुपये 61 पैसे बैठी।
इसके बाद उसी व्यक्ति ने बिल्कुल यही प्रयोग गैस चूल्हे पर भी दोहराया। इस बार उसने एक छोटे गैस सिलेंडर का इस्तेमाल किया, जिसमें लगभग 311 ग्राम गैस मौजूद थी। दो लीटर पानी को उसी तापमान तक गर्म करने के बाद सिलेंडर का वजन फिर से मापा गया। इससे पता चला कि इस प्रक्रिया में करीब 22 ग्राम गैस खर्च हुई। जब इस गैस की कीमत का हिसाब लगाया गया तो इसकी लागत लगभग 1 रुपये 70 पैसे आई।
दोनों प्रयोगों के बाद व्यक्ति ने गैस और बिजली की कीमतों के आधार पर तुलना की। इस तुलना में सामने आया कि इंडक्शन कुकटॉप पर पानी गर्म करना गैस की तुलना में थोड़ा सस्ता पड़ा। हालांकि यह अंतर बहुत बड़ा नहीं था, बल्कि महज कुछ पैसों का ही था। लेकिन फिर भी इस छोटे से अंतर ने लोगों का ध्यान खींच लिया और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक जीवन में खाना पकाने की लागत कई बातों पर निर्भर करती है। इसमें बिजली और गैस की स्थानीय कीमतें, बर्तनों की गुणवत्ता, चूल्हे की दक्षता और खाना पकाने का समय जैसे कई कारक शामिल होते हैं। इसलिए हर घर में खर्च का आंकड़ा अलग-अलग हो सकता है।
फिलहाल इस वायरल प्रयोग ने यह जरूर दिखा दिया है कि आधुनिक इंडक्शन कुकटॉप भी ऊर्जा की दृष्टि से काफी प्रभावी हो सकते हैं। हालांकि गैस और इंडक्शन दोनों के अपने-अपने फायदे और सीमाएं हैं। ऐसे में उपभोक्ता अपनी जरूरत, सुविधा और बजट के अनुसार किसी भी विकल्प को चुन सकते हैं।