
तीसरी बार बढ़ोतरी से होटल-रेस्टोरेंट कारोबार पर असर, घरेलू उपभोक्ताओं को राहत
नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संकट के बीच एलपीजी गैस के दामों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 1 अप्रैल की आधी रात से लागू नई दरों के अनुसार 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 2000 रुपये के पार पहुंच गई है। यह पिछले एक महीने में तीसरी बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। तेल कंपनियों द्वारा जारी नई दरों के मुताबिक, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में करीब 200 रुपये तक का इजाफा किया गया है। हालांकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह रही कि 14.2 किलो वाले रसोई गैस सिलेंडर के दामों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है।
प्रमुख शहरों में नई कीमतें
नई दरों के अनुसार राजधानी दिल्ली में 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर अब 2078.50 रुपये में मिलेगा। कोलकाता में इसकी कीमत 2208 रुपये, मुंबई में 2031 रुपये और चेन्नई में 2246.50 रुपये तय की गई है। अलग-अलग शहरों में परिवहन और स्थानीय करों के कारण कीमतों में अंतर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले एक महीने के भीतर कमर्शियल सिलेंडर के दामों में कुल मिलाकर करीब 300 रुपये से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। मार्च की शुरुआत में जहां कीमतें अपेक्षाकृत कम थीं, वहीं अब यह तेजी से बढ़कर 2000 रुपये के पार पहुंच गई हैं।
घरेलू सिलेंडर की कीमतों में स्थिरता
कमर्शियल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कुछ राहत बनी हुई है। 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। वर्तमान में दिल्ली में घरेलू सिलेंडर करीब 913 रुपये, कोलकाता में 939 रुपये, मुंबई में 912.50 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये में उपलब्ध है। इससे पहले 7 मार्च को घरेलू सिलेंडर के दामों में करीब 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।
क्यों बढ़ रहे हैं गैस के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार एलपीजी की कीमतों में वृद्धि के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। मध्य पूर्व क्षेत्र में जारी तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा के कारण गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई है। साथ ही वैश्विक बाजार में ऊर्जा कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। आमतौर पर कतर, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से गैस की आपूर्ति होती रही है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के कारण वैकल्पिक स्रोतों से गैस खरीदनी पड़ रही है। अमेरिका, नॉर्वे और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आयात करने में परिवहन लागत अधिक आती है, जिससे कुल कीमत बढ़ जाती है।
कारोबारियों पर बढ़ेगा दबाव
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों पर पड़ने की संभावना है। गैस की लागत बढ़ने से इनके संचालन खर्च में वृद्धि होगी, जिसका असर उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का दबाव बना रहता है, तो आने वाले महीनों में गैस के दामों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
हर महीने होती है कीमतों की समीक्षा
तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को गैस सिलेंडर के दामों की समीक्षा करती हैं और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार कीमतों में बदलाव करती हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं और कारोबारियों की नजर अब आने वाले महीनों की दरों पर टिकी रहेगी।
फिलहाल, कमर्शियल गैस की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को अस्थायी राहत जरूर मिली है।