व्यापार समझौता देशहित के खिलाफ’: न्याय सत्याग्रह में केंद्र पर कांग्रेस के नसीम खान का तीखा हमला


मुंबई। केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर राजनीतिक तापमान एक बार फिर बढ़ गया है। मुंबई यूथ कांग्रेस के ‘न्याय सत्याग्रह’ आंदोलन में शामिल हुए कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य और पूर्व मंत्री आरिफ नसीम खान ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए अमेरिका के साथ हुए हालिया व्यापार समझौते को देशहित के प्रतिकूल बताया और इसे तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई।
अपने संबोधन में नसीम खान ने कहा कि यह समझौता भारत की आर्थिक संप्रभुता और नीतिगत स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाला कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यह निर्णय बाहरी दबावों में लिया है, जिससे देश के आत्मनिर्भर आर्थिक ढांचे पर प्रश्नचिह्न लगते हैं। विशेष रूप से कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि इस समझौते के चलते किसानों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और उनकी आय व प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि देश का अन्नदाता पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे में इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय समझौते उनकी स्थिति को और कमजोर कर सकते हैं। नसीम खान ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बीते कुछ वर्षों से मूलभूत मुद्दों से ध्यान हटाकर समाज में विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा दे रही है।
रोजगार और आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और महंगाई आम जनता की कमर तोड़ रही है। उद्योगों की रफ्तार धीमी पड़ने से युवाओं के लिए अवसर सीमित हो गए हैं, जिससे व्यापक असंतोष का माहौल बन रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इन ज्वलंत मुद्दों पर ठोस और प्रभावी कदम उठाए।
विकास कार्यों में कथित भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए नसीम खान ने कहा कि केंद्र, राज्य और महानगरपालिका स्तर पर निधियों के आवंटन में पारदर्शिता और निष्पक्षता का अभाव दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के क्षेत्रों को योजनाओं में प्राथमिकता नहीं दी जाती, जिससे संतुलित विकास बाधित होता है। उन्होंने मांग की कि संसाधनों का वितरण बिना किसी राजनीतिक पूर्वाग्रह के किया जाना चाहिए।
चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। भारतीय चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल समय-समय पर शंकाएं व्यक्त करते रहे हैं, जिन्हें दूर करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है। इस संदर्भ में उन्होंने बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसकी सुनवाई 16 और 17 अप्रैल को प्रस्तावित है।
कार्यक्रम में मुंबई यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष ज़ीनत शबरीन ने भी केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि देश के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। यह आंदोलन वर्षा गायकवाड़ के नेतृत्व में संचालित हो रहा है, जिसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
‘न्याय सत्याग्रह’ के मंच से कांग्रेस ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह आर्थिक नीतियों, सामाजिक सरोकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी। पार्टी का कहना है कि वह जनहित से जुड़े हर मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

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