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लाडकी बहन योजना पर उठे सवाल, 68 लाख महिलाएं अपात्र घोषित

by trilokvivechana
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लाभार्थियों की संख्या घटी, सरकार की प्रक्रिया और मंशा पर घिरी आलोचना
मुंबई।
महाराष्ट्र सरकार की बहुचर्चित ‘लाडकी बहन योजना’ अब विवादों के केंद्र में आ गई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ी पहल के रूप में पेश की गई इस योजना में अब तक करीब 68 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित कर बाहर कर दिया गया है। इस बड़े बदलाव ने सरकार की कार्यप्रणाली और योजना की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, योजना के प्रारंभिक चरण में व्यापक स्तर पर महिलाओं को लाभ दिया गया था। लेकिन बाद में पात्रता की विस्तृत जांच शुरू होने पर बड़ी संख्या में आवेदनों को खारिज किया गया। जुलाई 2025 तक जहां 26.34 लाख आवेदन निरस्त किए गए थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 68 लाख तक पहुंच गया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या शुरुआती स्तर पर पात्रता की सही जांच नहीं की गई थी।
सरकार का पक्ष है कि जिन महिलाओं को बाहर किया गया है, वे निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरीं। पात्रता के लिए परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होना, घर में चारपहिया वाहन न होना, आवेदक का सरकारी सेवा में न होना, अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ न लेना और आयु सीमा 21 से 65 वर्ष के बीच होना अनिवार्य है। इन शर्तों के आधार पर छंटनी की गई है।
हालांकि विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने शुरुआत में बिना पर्याप्त सत्यापन के बड़ी संख्या में लाभ वितरित किए और अब वित्तीय दबाव बढ़ने पर लाभार्थियों की संख्या कम की जा रही है। इससे योजना के उद्देश्य और पारदर्शिता पर संदेह पैदा हो रहा है।
इस बीच, केवाईसी (KYC) प्रक्रिया भी बड़ी बाधा बनकर सामने आई है। बड़ी संख्या में महिलाएं समय पर केवाईसी पूरी नहीं कर सकीं, जिसके चलते उन्हें योजना से बाहर कर दिया गया। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी और तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या इतनी जटिल प्रक्रिया लागू करना उचित था।
शुरुआत में इस योजना के तहत लगभग 2.47 करोड़ महिलाएं लाभार्थी थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर करीब 1.7 करोड़ रह गई है। यानी लाखों महिलाएं योजना से बाहर हो चुकी हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे का आगामी समय में बड़ा राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल, सरकार के सामने चुनौती है कि वह पारदर्शिता बनाए रखते हुए पात्र महिलाओं तक योजना का लाभ सुनिश्चित करे और उठ रहे सवालों का ठोस जवाब दे।

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