महाराष्ट्र में ‘व्यावहारिक मराठी’ की पहल, ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए भाषा ज्ञान अनिवार्य करने की तैयारी

मुंबई, 22 अप्रैल
महाराष्ट्र में मराठी भाषा के उपयोग को बढ़ावा देने और यात्रियों के साथ संवाद को सहज बनाने के लिए राज्य सरकार एक अहम नीति बदलाव की तैयारी में है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने संकेत दिए हैं कि ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए रोजमर्रा की उपयोगी मराठी बोलना अनिवार्य किया जा सकता है। इसके लिए मोटर वाहन नियमों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मोटर वाहन नियम 4, 28 और 85 में बदलाव के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में परिवहन विभाग और मराठी भाषा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ भाषा विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि इसे लागू करने में किसी प्रकार की कठिनाई न आए।

सरकार का मानना है कि महानगरों में बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से आने वाले चालक कार्यरत हैं, जिनके लिए स्थानीय भाषा का ज्ञान यात्रियों से संवाद के लिहाज से बेहद जरूरी है। मौजूदा मराठी भाषा अधिनियम के तहत पहले से ही यात्रियों से बातचीत में बुनियादी मराठी ज्ञान को प्रोत्साहित किया गया है, लेकिन अब इसे और व्यवस्थित रूप से लागू करने की तैयारी है।

प्रस्तावित बदलाव के तहत ड्राइविंग लाइसेंस, बैज और परमिट जारी करने या उनके नवीनीकरण के दौरान भाषा ज्ञान की शर्त जोड़ी जा सकती है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य चालकों पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं है, बल्कि उन्हें व्यवहारिक मराठी सिखाकर संवाद को आसान बनाना है। इसके लिए सरल वाक्यों और दैनिक उपयोग की भाषा पर आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया जाएगा।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को लागू करने की जिम्मेदारी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को दी जाएगी। इन संस्थाओं के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां चालकों को मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद चालकों को प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा, जो भविष्य में उनके लाइसेंस और परमिट से संबंधित प्रक्रियाओं में सहायक होगा।

सरकार ने इस पूरी योजना को लागू करने के लिए करीब 100 दिनों की समयसीमा तय की है। इस अवधि में पाठ्यक्रम निर्माण, प्रशिक्षण ढांचा तैयार करने और आवश्यक नियमों को अंतिम रूप देने का कार्य पूरा किया जाएगा।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया कि यह पहल किसी के रोजगार को प्रभावित करने के लिए नहीं है, बल्कि राज्य में काम करने वाले सभी लोगों को स्थानीय भाषा से जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि इसे दंडात्मक नहीं, बल्कि प्रशिक्षण और जागरूकता आधारित अभियान के रूप में लागू किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न केवल यात्रियों और चालकों के बीच संवाद बेहतर होगा, बल्कि मराठी भाषा के संरक्षण और प्रसार को भी मजबूती मिलेगी। अगर यह योजना सफल होती है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।

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