
नाशिक। महाराष्ट्र के नाशिक स्थित बालिका सैन्य पूर्व प्रशिक्षण केंद्र ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी गुणवत्ता का परचम लहराया है। इस प्रतिष्ठित संस्थान की दो छात्राओं ने देश की सबसे चुनौतीपूर्ण रक्षा प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल करते हुए राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में जगह बनाई है। सीमित सीटों और कड़े प्रतिस्पर्धी माहौल के बीच यह उपलब्धि न केवल संस्थान बल्कि पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय बन गई है।
चयनित छात्राओं में कुमारी जिया सचिन करपे ने अखिल भारतीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, जबकि कुमारी समृद्धि प्रवीण इंगले ने 15वां स्थान हासिल किया है। गौरतलब है कि इस वर्ष पूरे देश से केवल 19 बालिकाओं का चयन एनडीए के लिए हुआ है, ऐसे में नाशिक केंद्र की दो छात्राओं का चयन विशेष महत्व रखता है।
इन छात्राओं की सफलता उनके कठोर परिश्रम, अनुशासन और निरंतर प्रशिक्षण का परिणाम है। संस्थान में उन्हें शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती और शैक्षणिक तैयारी का समन्वित प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें। यही कारण है कि यह केंद्र अब देशभर में एक मॉडल संस्थान के रूप में उभर रहा है।
इस उपलब्धि पर महाराष्ट्र के शालेय शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने दोनों छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई यह पहल आने वाले समय में और अधिक बेटियों को रक्षा सेवाओं में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगी।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने 18 जून 2023 को नाशिक में इस विशेष प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य बालिकाओं को रक्षा सेवाओं में अधिकारी बनने के लिए प्रारंभिक स्तर से तैयार करना है। यहां 11वीं और 12वीं कक्षा की छात्राओं के लिए दो वर्षीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जाता है, जिसमें सैन्य अनुशासन, शारीरिक प्रशिक्षण, नेतृत्व क्षमता और शैक्षणिक दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
यह देश का पहला ऐसा केंद्र माना जा रहा है, जहां बालिकाओं को एनडीए प्रवेश के लिए व्यवस्थित और समर्पित प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे पहले भी इसी संस्थान की छात्रा हंसिका टिल्लू एनडीए में चयनित होकर इस पहल की सफलता को प्रमाणित कर चुकी हैं।
लगातार दूसरे वर्ष दो छात्राओं के चयन ने इस संस्थान की प्रशिक्षण प्रणाली और गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रयास देश में महिलाओं की भागीदारी को रक्षा सेवाओं में बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।
नाशिक की इन बेटियों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन, अवसर और संकल्प के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। यह उपलब्धि न केवल राज्य के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि देशभर की युवतियों के लिए प्रेरणा की नई कहानी भी है।