Home ताजा खबरमुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर ‘मिसिंग लिंक’ का उद्घाटन बना जाम की वजह, 3–4 घंटे तक फंसे रहे वाहन

मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर ‘मिसिंग लिंक’ का उद्घाटन बना जाम की वजह, 3–4 घंटे तक फंसे रहे वाहन

by trilokvivechana
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मुंबई। लंबे समय से प्रतीक्षित मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे के खंडाला स्थित बोरघाट विकल्प ‘मिसिंग लिंक’ का उद्घाटन शुक्रवार को धूमधाम से किया गया, लेकिन यह ऐतिहासिक क्षण कई यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन गया। लंबे वीकेंड की शुरुआत के साथ ही मुंबई से पुणे की ओर निकले हजारों वाहन चालकों को खालापुर टोल नाका से लेकर बोरघाट तक करीब 23 किलोमीटर लंबे मार्ग पर भीषण ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।

सामान्य दिनों में यह दूरी लगभग 30 मिनट में तय हो जाती है, लेकिन उद्घाटन समारोह और बढ़ते यातायात दबाव के चलते कई वाहन चालक तीन से चार घंटे तक जाम में फंसे रहे। सुबह से ही मुंबई–पुणे लेन पर वाहनों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं, जो दोपहर तक विकराल रूप ले चुकी थीं।

इस बहुप्रतीक्षित ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना का उद्घाटन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार की मौजूदगी में किया। खालापुर टोल नाके से लगभग तीन किलोमीटर आगे बनाए गए इस नए लिंक रोड पर ही उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी कारण आसपास के क्षेत्र में यातायात का दबाव अचानक बढ़ गया और पूरा सिस्टम चरमरा गया।

हालांकि कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया और स्थिति को अस्थायी बताया, लेकिन जमीनी हालात देर शाम तक सामान्य नहीं हो सके। करीब चार बजे तक खालापुर टोल नाका से लेकर खंडाला घाट तक वाहनों की रफ्तार बेहद धीमी रही और कई स्थानों पर ट्रैफिक पूरी तरह ठप नजर आया।

लंबे वीकेंड की शुरुआत और नए इंफ्रास्ट्रक्चर के उद्घाटन ने जहां एक ओर उम्मीदें बढ़ाई थीं, वहीं दूसरी ओर ट्रैफिक प्रबंधन की कमजोर तैयारियों ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी। कई यात्रियों ने घंटों तक बिना आगे बढ़े वाहनों में फंसे रहने पर नाराजगी जताई।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बड़े उद्घाटनों के दौरान वैकल्पिक यातायात व्यवस्था और सख्त ट्रैफिक डायवर्जन प्लान की आवश्यकता होती है, ताकि आम जनता को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सके।

फिलहाल ‘मिसिंग लिंक’ को लेकर उम्मीदें तो बड़ी हैं, लेकिन उद्घाटन के दिन लगी यह जाम की तस्वीर प्रशासन के लिए एक बड़ा सवाल छोड़ गई है—क्या विकास परियोजनाओं के साथ सुचारू यातायात प्रबंधन उतना ही जरूरी नहीं?

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