Home ताजा खबरपुणे में एसीबी का बड़ा एक्शन: इंस्पेक्टर और सहयोगी 28 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

पुणे में एसीबी का बड़ा एक्शन: इंस्पेक्टर और सहयोगी 28 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

by trilokvivechana
0 comments

पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने शनिवार को एक हाई-प्रोफाइल ट्रैप कार्रवाई करते हुए पुलिस इंस्पेक्टर वैषाली तोटेवार और उनके सहयोगी संभाजी चव्हाण को 28 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई शहर के मंगलदास रोड स्थित एक पांच सितारा होटल के बाहर की गई, जिसने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

एसीबी की टीम, जिसका नेतृत्व डिप्टी एसपी नीता मिसाल और सतीश वालके कर रहे थे, ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को दबोचा। इस मामले में कोरेगांव पार्क पुलिस स्टेशन में भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। एसीबी पुणे के एसपी शिरीष सरदेशपांडे ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की गहराई से जांच जारी है।

गौर करने वाली बात यह है कि वैषाली तोटेवार हाल ही में पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में तैनात थीं। उन्हें गुरुवार को इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन मिला था और मुंबई के गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) में स्थानांतरण भी किया गया था। शुक्रवार को उन्हें नई पोस्टिंग के लिए रिलीव कर दिया गया था, लेकिन इससे पहले ही एसीबी ने उन्हें पकड़ लिया।

जांच में एक दिलचस्प खुलासा भी हुआ है। जिस बैग में रिश्वत की रकम दी गई थी, उसमें केवल 1.5 लाख रुपये असली थे, जबकि बाकी राशि ‘चिल्ड्रन प्ले नोट्स’ यानी नकली जैसे दिखने वाले नोट थे, जिन्हें ट्रैप ऑपरेशन के तहत इस्तेमाल किया गया था।

यह पूरा मामला एक जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता जमीन मालिक ने आरोप लगाया था कि उसने साहूकार से लिया गया कर्ज चुका दिया है, फिर भी उससे अतिरिक्त रकम मांगी जा रही थी और जमीन के दस्तावेज वापस नहीं किए जा रहे थे। इस मामले की जांच तोटेवार को सौंपी गई थी।

आरोप है कि दिसंबर 2025 में तोटेवार ने शिकायतकर्ता से 30 लाख रुपये की रिश्वत मांगी और उसके पक्ष में रिपोर्ट देने का भरोसा दिया। उस दौरान उन्होंने 2 लाख रुपये पहले ही ले लिए थे और बाद में शेष 28 लाख रुपये के लिए लगातार दबाव बना रही थीं।

एसीबी के अनुसार, तोटेवार ने शिकायतकर्ता को डराया कि साहूकार उसकी जमीन बेच सकता है और विवाद सुलझाने के लिए उसे 1 करोड़ रुपये देने की सलाह भी दी। बाद में उसी साहूकार ने भी जमीन मालिक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसकी जांच भी तोटेवार के पास ही थी।

एसीबी अब इस पूरे मामले में संभावित मिलीभगत, दबाव और भ्रष्टाचार के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। यह कार्रवाई एक बार फिर सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को रेखांकित करती है।

You may also like

Leave a Comment

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?
-
00:00
00:00
Update Required Flash plugin
-
00:00
00:00