लोगों की जान बचाते-बचाते शहीद हुए दमकल अधिकारी, धुएं और लपटों में तब्दील हुआ पूरा बाजार
मुंबई/ठाणे: ठाणे के नौपाड़ा स्थित गावदेवी सब्जी मार्केट में बुधवार तड़के लगी भीषण आग ने पूरे शहर को गहरे सदमे में डाल दिया। सुबह करीब 3:30 बजे अचानक उठीं आग की लपटों ने कुछ ही मिनटों में पूरे बाजार को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते सब्जी मंडी धुएं, चीख-पुकार और आग के विकराल गुबार में बदल गई। इस हादसे में लोगों की जान बचाने में जुटे दो बहादुर कर्मियों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि दो दमकलकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग इतनी तेजी से फैली कि आसपास रहने वाले लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। बाजार से उठती आग की ऊंची लपटें दूर-दूर तक दिखाई दे रही थीं। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और पुलिस को पूरे इलाके को घेरकर लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखना पड़ा।
हादसे में ठाणे महानगरपालिका के सुरक्षा रक्षक कालू शंकर गाडेकर और दमकल विभाग के स्टेशन ऑफिसर सागर शिंदे की मौत हो गई। दोनों आग के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और हालात नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे। बताया जा रहा है कि मंडी के भीतर घना धुआं भर गया था और तापमान लगातार बढ़ रहा था, जिससे राहत कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया। इसी दौरान दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
वहीं दमकलकर्मी सुजीत पष्टे और समीर जाधव भी आग बुझाने के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों का इलाज कलवा स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज अस्पताल में चल रहा है, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की पांच गाड़ियां, जंबो वॉटर टैंकर, रेस्क्यू वैन और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं। कई घंटों तक चले संयुक्त अभियान के बाद आग पर काबू पाया जा सका। अधिकारियों के अनुसार मंडी में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक क्रेट, लकड़ी और अन्य ज्वलनशील सामग्री रखी थी, जिसने आग को और भयावह बना दिया।
प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस, दमकल विभाग और आपदा प्रबंधन की संयुक्त टीम पूरे मामले की जांच में जुटी है।
ड्यूटी निभाते हुए दमकल अधिकारी और सुरक्षा कर्मी की मौत ने पूरे ठाणे शहर को भावुक कर दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें “सच्चा जनसेवक” बताया।
इस हादसे ने एक बार फिर शहर की बाजारों और सार्वजनिक इमारतों में अग्नि सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर घनी आबादी वाले बाजारों में सुरक्षा मानकों की नियमित जांच क्यों नहीं होती और हादसों से सबक लेने के बावजूद व्यवस्थाएं अब तक क्यों नहीं सुधरीं।