बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में दहशत, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
बीएमसी पर लापरवाही के गंभीर आरोप, पकड़कर छोड़े गए आक्रामक कुत्ते
मुंबई: कांदिवली पूर्व के 90 फीट रोड इलाके में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक अब स्थानीय लोगों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है। शिवालय, शिवालिक, सत्यम और गायत्री शिवम् इमारतों के आसपास रहने वाले नागरिक भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों का दावा है कि इलाके में घूम रहे चार से पांच आवारा कुत्तों में से दो बेहद आक्रामक हैं और अब तक 50 से अधिक लोगों को काट चुके हैं।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि छोटे बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और रोजमर्रा की सेवाएं देने वाले डिलिवरी कर्मचारी भी इलाके में आने-जाने से डरने लगे हैं। सुबह और रात के समय लोगों ने घरों से बाहर निकलना तक कम कर दिया है।
स्थानीय नागरिकों, जिनमें सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी सुदेश रासकर और कर्नल कावल गिरीधर भी शामिल हैं, ने पालिका प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद बीएमसी का आर-नॉर्थ विभाग ठोस कदम उठाने में विफल रहा है।
निवासियों के मुताबिक, डॉग कंट्रोल विभाग ने 9 और 12 मई को दो आक्रामक कुत्तों को पकड़कर ले जाया था। लेकिन लोगों का आरोप है कि उन्हीं कुत्तों को 18 मई को दोबारा उसी इलाके में छोड़ दिया गया। इससे नागरिकों में प्रशासन के प्रति गुस्सा और अविश्वास बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के 7 नवंबर 2025 के आदेश की प्रति भी सौंपी थी, जिसमें नागरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी। इसके बावजूद कथित तौर पर प्रशासन मामले को गंभीरता से लेने के बजाय लोगों को आश्वासन देकर टालता रहा।
मंगलवार सुबह हालात तब और चिंताजनक हो गए जब इलाके के एक उद्यान में काम कर रहे माली पर काले रंग के एक आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया। हमले में माली गंभीर रूप से घायल हो गया। डॉक्टरों ने गहरे जख्मों को देखते हुए उसे इंजेक्शन देने के बाद रातभर निगरानी में रखने की सलाह दी है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने मांग की है कि आक्रामक कुत्तों को तत्काल हटाया जाए, इलाके में नियमित निगरानी बढ़ाई जाए और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीति बनाई जाए।