सड़क हादसे का मुखौटा पहनाकर सच दबाने की कोशिश; मुंबई क्राइम ब्रांच ने खोला राज
मुंबई। चार साल पुराने एक रहस्यमय मौत के मामले में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा (कक्ष-7) ने ऐसा खुलासा किया है जिसने दोस्ती, विश्वास और लालच के खतरनाक चेहरे को उजागर कर दिया है। सिंधुदुर्ग जिले के कुडाल में हुई एक युवक की मौत, जिसे लंबे समय तक सड़क दुर्घटना माना जाता रहा, दरअसल एक सुनियोजित हत्या निकली। अपराध शाखा की सूक्ष्म जांच और तकनीकी पड़ताल ने इस सनसनीखेज साजिश की परतें खोलते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, कणकवली पुलिस स्टेशन में दर्ज अपराध क्रमांक 347/2022 की जांच के दौरान कई संदिग्ध पहलू सामने आए थे। मामले की तह तक पहुंचने के लिए अपराध शाखा कक्ष-7 के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक आत्माजी सावंत और उनकी टीम ने मानवीय खुफिया तंत्र तथा तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। इसी दौरान मिली एक गोपनीय सूचना ने जांच को नई दिशा दे दी।
जांच में खुलासा हुआ कि मृतक आशापाक मुलाणी उर्फ निहाल, निवासी माळशिरस (जिला सोलापुर), और आरोपियों के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद को समाप्त करने के नाम पर मृतक को सिंधुदुर्ग जिले के कुडाल स्थित एक होटल में बुलाया गया। लेकिन बातचीत के बहाने बुलाई गई यह मुलाकात उसके लिए मौत का जाल साबित हुई।
पुलिस के अनुसार, रात के अंधेरे में आरोपियों ने मिलकर निहाल की हत्या कर दी। इसके बाद अपराध को दुर्घटना का रूप देने के लिए शव और उसकी मोटरसाइकिल को फोंडा घाट की गहरी खाई में फेंक दिया गया। पूरी साजिश का मकसद हत्या के सबूत मिटाना और जांच एजेंसियों को गुमराह करना था। प्रारंभिक तौर पर इसे सड़क दुर्घटना समझा गया, लेकिन समय के साथ सामने आए तथ्यों ने कहानी बदल दी।
अपराध शाखा की लगातार पड़ताल के बाद इस हत्या कांड में शामिल चार आरोपियों—मनोज नारायण भोंडे, बृजेंद्र चंद्रहास सोनवडेकर, अतिश भगवान मोरे और ऋतुराज शेट्टी—को गिरफ्तार कर लिया गया। सभी आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सिंधुदुर्ग पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
मुंबई पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई आधुनिक तकनीकी जांच, खुफिया जानकारी और सटीक विश्लेषण का परिणाम है। पुलिस आयुक्त देवेन भारती के नेतृत्व में अपराध शाखा की टीम ने यह साबित कर दिया कि अपराध कितना भी योजनाबद्ध क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच पाना आसान नहीं है। इस खुलासे ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सच भले ही देर से सामने आए, लेकिन छिपता नहीं।