
बोईसर। पालघर जिले के मनोर क्षेत्र के समीप एक बंद पड़ी पत्थर खदान में शुक्रवार दोपहर नहाने गए दो मासूम बच्चों की डूबने से मौत हो गई, जबकि तीसरा बच्चा बाल-बाल बच गया। घटना के बाद इलाके में मातम पसरा हुआ है। पुलिस, राजस्व विभाग और अग्निशमन दल की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और खोज अभियान में जुटी रहीं।
हादसा मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर मस्तान नाका फ्लाईओवर के पश्चिम में स्थित टाकवहाल गांव की सीमा में हुआ। जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब दो बजे तीन नाबालिग बच्चे तेज गर्मी से राहत पाने के लिए बंद पड़ी खदान में जमा पानी में नहाने पहुंचे थे। पानी की गहराई का सही अंदाजा न लग पाने के कारण जिग्नेश विजय पवार (8 वर्ष) और आयुष मुकेश पवार (15 वर्ष) गहरे पानी में चले गए और डूब गए। तीसरा बच्चा किसी तरह किनारे तक पहुंचने में सफल रहा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नहाते समय जिग्नेश का पैर फिसल गया और वह अचानक गहरे हिस्से में चला गया। उसे बचाने के प्रयास में आयुष भी पानी में कूद पड़ा, लेकिन वह भी गहराई में समा गया। दोनों को डूबते देख तीसरा बच्चा घबराकर घर की ओर भागा और परिजनों को सूचना दी। इसके बाद आसपास के लोगों ने पुलिस को खबर दी।
सूचना मिलते ही मनोर पुलिस थाने की टीम घटनास्थल पर पहुंची और स्थानीय ग्रामीणों की सहायता से प्रारंभिक तलाश शुरू की गई। बाद में वसई-विरार महानगरपालिका के अग्निशमन दल को बुलाया गया। दमकल कर्मियों ने खदान में उतरकर गहन खोज अभियान चलाया। कई घंटों की मशक्कत के बाद जिग्नेश का शव पानी से बाहर निकाला गया। हालांकि आयुष की तलाश देर शाम तक जारी रही। अंधेरा बढ़ने के कारण रात में अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया गया, जिसे अगले दिन फिर शुरू करने की बात कही गई।
बताया जाता है कि मृतक बच्चों के परिवार मूल रूप से इंदौर (मध्य प्रदेश) के निवासी हैं और हाल ही में रोजगार की तलाश में मनोर क्षेत्र में आकर बसे थे। दोनों परिवार घुमंतू समुदाय से जुड़े बताए जा रहे हैं। इस हादसे ने परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।
गौरतलब है कि यह खदान पहले भी हादसों का कारण बन चुकी है। करीब आठ महीने पहले कपड़े धोने गई एक महिला की भी इसी स्थान पर डूबने से मौत हो गई थी। क्षेत्र में कई बंद और असुरक्षित खदानें खुली पड़ी हैं, जिनमें बरसात और गर्मियों के दौरान पानी भर जाता है। स्थानीय लोग, विशेषकर महिलाएं और बच्चे, इन जलाशयों का उपयोग नहाने या कपड़े धोने के लिए करते हैं, जिससे जोखिम बढ़ जाता है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी खतरनाक और परित्यक्त खदानों को घेराबंदी कर सुरक्षित बनाया जाए या चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।