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एसटी में सौर ऊर्जा क्रांति की शुरुआत, 2.57 मेगावाट परियोजना को मंजूरी

by trilokvivechana
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महाराष्ट्र में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक अहम पहल शुरू हो चुकी है। प्रताप सरनाईक ने जानकारी दी कि महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन निगम (एसटी) में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए पहले चरण की परियोजना को मंजूरी दे दी गई है। इस चरण में 2.57 मेगावाट क्षमता की ग्रिड-आधारित सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित की जाएगी।

सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए करीब 13.03 करोड़ रुपये के बजट को प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। इस निवेश का उद्देश्य एसटी के विभिन्न परिसरों में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाना और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करना है। मंत्री सरनाईक के मुताबिक, यह परियोजना ऊर्जा प्रबंधन के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाएगी।

योजना के तहत राज्य भर के बस अड्डों, प्रशासनिक कार्यालयों, कार्यशालाओं और डिपो की छतों पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इन पैनलों से उत्पन्न बिजली का उपयोग उसी परिसर में किया जाएगा, जिससे बिजली वितरण में होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही, बिजली बिल में भी उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। अनुमान है कि इस पहल से हर साल लगभग 3 से 4 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है, जो एसटी निगम की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में सहायक होगी।

परिवहन मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना के क्रियान्वयन में सभी तकनीकी मानकों और पर्यावरणीय नियमों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। इसके लिए मानक डिजाइन और आवश्यक अनुमतियों को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित बनी रहे। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

सरनाईक ने इस कदम को हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक निर्णायक प्रयास बताया। उनका कहना है कि इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी प्रोत्साहन मिलेगा। आने वाले समय में इस परियोजना का विस्तार अन्य चरणों में भी किया जा सकता है, जिससे पूरे राज्य में एसटी नेटवर्क को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल रहती है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। इससे सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में टिकाऊ विकास को गति मिलेगी और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को अपनाने की दिशा में नया रास्ता खुलेगा।

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